बिहार कथा
गरीब रैली से भड़के ‘बाबू साहब’ ने बेच दी थी बस
गरीब रैली से भड़के ‘बाबू साहब’ ने बेच दी थी बस पोलिटिकल कथा यात्रा – 4 — वीरेंद्र यादव, वरिष्ठ संसदीय पत्रकार, पटना — 1990 में लालू यादव के सत्ता में आने के बाद बिहार की राजनीतिक जमीन बदलने लगी थी। इसका असर जातीय अहंकार पर पड़ने लगा था। कुछ लोगों ने जातीय अहंकार की गांठ भी बांध ली थी। घटना बांका जिले की है। लालू यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद संभवत: 1993 में गरीब रैली पटना में हुई थी। इसे कई लोगों ने ऐतिहासिक रैली की संज्ञा भीRead More
मेक इन इंडिया को फोर्ड का झटका
फोर्ड का जाना मेक इन इंडिया के लिए बड़े झटके जैसा —— आज इस बारे में आत्मनिरीक्षण की जरूरत है कि जनरल मोटर्स और फोर्ड जैसी बहुराष्ट्रीय वाहन कंपनियां भारत जैसे बड़े बाजार और बेहतर उत्पादन सुविधाओं के बावजूद क्यों बंद हो रही हैं. साल 2010 तक हर साल 10 फीसदी की दर से बढ़ रहा वाहन बाजार आज पिछले साल जितनी बिक्री को कायम रखने में जूझ रहा है. — राजेश जोशी पिछले करीब 10 सालों से घटती बिक्री और हजारों करोड़ रुपए के घाटे में फंसी अमेरिकी कारRead More
सामाजिक समरसता का आईना था लालू यादव का पहला मंत्रिमंडल
सामाजिक समरसता का आईना था लालू यादव का पहला मंत्रिमंडल वीरेन्द्र यादव,पटना। पोलिटिकल कथा यात्रा-3 ——————- पोलिटिकल कथा यात्रा की तीसरी कड़ी में आज लालू यादव के पहले कार्यकाल के मंत्रियों की सूची प्रकाशित कर रहे हैं। इसका संकलन सामाजिक कार्यकर्ता और अध्येता अरुण नारायण ने किया है। इसमें मंत्रियों के नाम, जाति, क्षेत्र और विभाग को भी शामिल किया गया है। मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद विभागों में फेरबदल किया गया। संकलन में पूरी सावधानी बरती गयी है। फिर इसमें संशोधन या सुधार अपेक्षित हो तो जरूर अवगतRead More
धर्म की राजनीति नहीं करते मगर धार्मिक स्थलों पर खूब जाते हैं राहुल
धर्म की राजनीति नहीं करते मगर धार्मिक स्थलों पर खूब जाते हैं राहुल – – – – – – – – – – – – – – – #शकील_अख्तर विपक्ष का नेता कौन है इसे पहचानने का सबसे आसान तरीका है यह देखना कि सत्तापक्ष और उसके सहयोगी जैसे मीडिया किसका विरोध सबसे ज्यादा कर रहे हैं! क्या राहुल गांधी के अलावा विपक्ष का कोई और नेता ऐसा है जिस पर इतने हमले हुए हों? सरकार, पार्टी, मीडिया, व्हट्सएप ग्रुप सब रात दिन लगे रहते हैं। क्यों? क्योंकि एक,Read More
बीस साल बाद तालिबान और सौ साल बाद गांधी
बीस साल बाद तालिबान और सौ साल बाद गांधी अरुण कुमार त्रिपाठी इतिहास सीधे चलते चलते गोल गोल घूमने लगता है। बड़ी दिखने वाली ताकतें हारने लगती हैं और पराजित दिखने वाले समूह जीतने लगते हैं। जिन मूल्यों की स्थापना के लिए दुनिया कसमें खाती है वे मूल्य ध्वस्त होने लगते हैं और जिन्हें मिटाने के लिए संकल्प लिया जाता है वे विजयी होने लगते हैं। कुछ ऐसा ही अफगानिस्तान में बीस साल बाद तालिबान की वापसी के साथ भी हो रहा है। अमेरिका ने 9/11 के हमले के बादRead More
पिछड़े युवाओं के लिए प्रशिक्षण अभियान था छात्र आंदोलन
पिछड़े युवाओं के लिए प्रशिक्षण अभियान था छात्र आंदोलन पोलिटिकल कथा यात्रा -2 — वीरेंद्र यादव, वरिष्ठ संसदीय पत्रकार, पटना — बिहार की राजनीति में 1967, 1977 और 1989 का लोकसभा चुनाव मील का पत्थर साबित हुआ है। इन तीनों चुनाव की जड़ में था पिछड़ी जातियों में राजनीतिक चेतना का विकास और सत्ता लालसा। समाजवादी आंदोलन के कारण पिछड़ी जातियों में सत्ता लालसा और संघर्ष बढ़ता जा रहा था। बिहार में नक्सल आंदोलन का विस्तार भी इसी दौर में शुरू हुआ था। नक्सल और समाजवादी आंदोलन के कारण सामाजिकRead More
नीतीश के विजन में ऑफसरशाही का पलीता
प्रवीन बागी इसमें कोई दो राय नहीं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विजनरी व्यक्ति हैं। उनके कार्यकाल में बिहार में विकास के कई महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। लेकिन उनकी टीम का होमवर्क कमजोर है। इसके चलते पैसे तो खूब खर्च हो रहे हैं, पर उसका पूरा लाभ जनता को नहीं मिल रहा। स्थिति ताड़ से गिरे तो खजूर में अटके वाली हो जा रही है। पटना में दीघा से आर ब्लॉक तक बने अटल पथ को ही ले लीजिए। दिनभर में इससे 100 से अधिक गाड़ियां नहीं गुजरतीं। उसRead More
लालू समर्थक विधायकों की संख्या में सेंधमारी की थी रघुनाथ झा ने
लालू समर्थक विधायकों की संख्या में सेंधमारी की थी रघुनाथ झा ने पोलिटिकल कथा यात्रा -1 — वीरेंद्र यादव, वरिष्ठ संसदीय पत्रकार, पटना — आज कथा यात्रा की तलाश में राजद कार्यालय पहुंचे। पूर्व विधान पार्षद तनवीर हसन से मुलाकात हुई। बातचीत के क्रम में उन्होंने बताया कि कर्पूरी ठाकुर ने रामचंद्र पूर्वे को पहली बार 1986 में विधान पार्षद भेजा था। तनवीर हसन खुद 1990 में लालू यादव के साथ एमएलसी बने थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू यादव लोकसभा से इस्तीफा देकर एमएलसी बने थे। इसी बातचीत मेंRead More
पहली पीढ़ी के लोग मारे जाएंगे,दूसरी पीढ़ी के लोग जेल जाएंगे और तीसरी पीढ़ी के लोग राज करेंगे
बिहार लेनिन बाबू जगदेव प्रसाद जी को उनके शहादत दिवस पर नमन चंद्र भूषण सिंह यादव बिहार में एक क्रांतिपुंज ने जन्म लिया जिनसे सामन्तवादियों व मनुवादियो की रूहें कांपने लगी। शहर-शहर सभाओं में यह ललकार गूंजने लगी कि “दस का शासन नब्बे पर,नही चलेगा,नही चलेगा”,सौ में नब्बे शोषित हैं,नब्बे भाग हमारा है”,धन-धरती और राजपाट में नब्बे भाग हमारा है”। कांग्रेसी शासन हैरान हो गया,भिन्न-भिन्न निजी सवर्ण सेनाओं के कान खड़े हो गए।शोषित समाज एकजुट होने लगा। बिहार में यह लगने लगा कि सामन्तवाद व सामन्तवाद की पोषक सत्ता उखड़Read More
राजनैतिक हलवाही के खिलाफ बिहार का लेनिन
बाबू जगदेव प्रसाद की शहादत दिवस पर सुभाष चंद्र कुशवाहा बाबू जगदेव प्रसाद का आज शहादत दिवस है। उनका समय और समाज, दोनों जिन विडंबनाओं से गुजरे हैं और उन्होंने जिस वैचारिकी की नींव आजादी के बीस साल बाद रख दी थी, उनके निहितार्थों में शामिल, जातिवादी उत्पीड़न से आजादी, नहीं मिली है। जो जबरे शोषक हैं, अपराधी हैं, सत्ता उन्हीं के दरवाजे की रेहन है। उन निहितार्थों की मुक्तिकामी चेतना को समझे बिना कोई जगदेव प्रसाद के विचारों और सोच को जातिवादी मुलम्मे से ढंकना चाहेगा या कोई उन्हेंRead More
