बिहार कथा

 

नेताओं के साथ फोटो का शौक़

नेताओं के साथ फोटो का शौक़: Gopeshwar Singh स्वतंत्रता आंदोलन के समय की बात है। एक पढ़े लिखे नौजवान का मन हुआ कि काश महात्मा गांधी के साथ उसकी तस्वीर होती! लेकिन समस्या थी कि गांधी जी तक वह पहुंचे कैसे? उसे मालूम था कि गांधी जी से मिलना और फोटो लेना बिल्कुल आसान नहीं है। उसने एक तरकीब निकाली। वह कांग्रेस सेवादल का निष्ठावान कार्यकर्ता बन गया। कुछ वर्षों बाद बिहार में जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रांतीय अधिवेशन हुआ जिसमें गांधी जी शामिल होने वाले थे, तो किसीRead More


नीतीश जी, छात्र सोनू यादव की गुहार कानों तक पहुंची है क्‍या ?

नीतीश जी, छात्र सोनू यादव की गुहार कानों तक पहुंची है क्‍या ? कब जागेगी अंतरात्‍मा ध्‍वस्‍त शिक्षा को भरोसेमंद बनाने के लिए! —- वीरेंद्र यादव, वरिष्‍ठ संसदीय पत्रकार, पटना —– मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला है नालंदा और उसी जिले के एक गांव का निवासी रणविजय यादव हैं। उनके पुत्र सोनू ने कड़ी सुरक्षा व्‍यवस्‍था के बीच मुख्‍यमंत्री के कारवां तक पहुंचा और अपनी बात मुख्‍यमंत्री के सामने रखी। उसने कहा कि वह आईएएस, आईपीएस बनना चाहता है, लेकिन सरकारी स्‍कूल में पढ़ाई नहीं होती है। उसने मुख्‍यमंत्रीRead More


नीतीश कुमार बिहार में लागू करे फ्री कॉमन और कंपलसरी एजुकेशन : पप्पू यादव

  नीतीश कुमार बिहार में लागू करे फ्री कॉमन और कंपलसरी एजुकेशन : पप्पू यादव सोनू से मिलकर पप्पू यादव ने सुशील मोदी पर बोला जोरदार हमला, कहा – जिस आदमी ने अपने बॉडीगार्ड को मरने छोड़ा वो क्या करेगा मदद पप्पू यादव के निर्देश पर जाप युवा अध्यक्ष राजू दानवीर ने लिया सोनू को गोद, उठाया आजीवन पढाई का खर्च राजू दानवीर ने कहा – राजनीति नहीं सेवा से पूरा होगा सोनू का सपना नालन्दा : जन अधिकार पार्टी के मुखिया और पूर्व सांसद पप्पू यादव ने आज नालन्दाRead More


दख़ल ज़रूरी है आह्लादिनी का

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल‘  सृष्टि की उत्पत्ति से, सृजन की वेदिका से, अक्ष के केन्द्र से, धर्म के आचरण से, कर्म की प्रधानता से, कृष के आकर्षण से, सनातन के सत्य से , चेतन के अवचेतन से, जो ऊर्जा का ऊर्ध्वाधर प्रभाव पैदा होता है, वह निःसंदेह सृजन के दायित्वबोध के कारण संसार की आधी आबादी को समर्पित है। ब्रह्माण्ड  की समग्र अवधारणा के केन्द्र में जो भाव स्थायी रूप से विद्यमान है, उन भावों के पोषण, पल्लवन और प्रवर्तन के लिए सृष्टि की प्रथम सृजक को पूजनीया के साथ-साथ पालक और पोषक की भूमिका का निर्वहन भी करना चाहिए। भगवत सत्ता द्वारा सृजन की परिकल्पनाRead More


आर्थिक मजबूती से बढ़ेगा हिन्दी का साम्राज्य

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल‘  भाषा और भारत के प्रतिनिधित्व के सिद्धांत में हिन्दी के योगदान को सदा से सम्मिलित किया जा रहा है और आगे भी किया जाएगा, किन्तु वर्तमान समय उस योगदान को बाजार अथवा पेट से जोड़ने का है। सनातन सत्य है कि विस्तार और विकास की पहली सीढ़ी व्यक्ति की क्षुधा पूर्ति से जुडी होती है, अनादि काल से चलते आ रहे इस क्रम में सफलता का प्रथम पायदान आर्थिक मजबूती से तय होता हैं। वर्तमान समय उपभोक्तावादी दृष्टि और बाजारमूलकता का है, ऐसे काल खंड में भूखे पेट भजन नहीं होय गोपालाRead More


Vuln!! Path it now!!

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रंग कुछ कहते हैं…

-फ़िरदौस ख़ान मानव सभ्यता में रंगों का काफ़ी महत्व रहा है. हर सभ्यता ने रंगों को अपने तरीक़े से अपनाया. दुनिया में रंगों के इस्तेमाल को जानना भी बेहद दिलचस्प है. कई सभ्यताओं को उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले रंगों की वजह से ही पहचाना गया. विक्टोरियन काल में ज़्यादातर लोग काला या स्लेटी रंग इस्तेमाल करते थे. एक तरह से ये रंग इनकी पहचान थे. फ़िरऔन हमेशा काले कपड़े पहनता था. वैसे भी हर रंग के अपने सकारात्मक और नकारात्मक असर होते हैं. इसलिए यह नहीं कर सकतेRead More


बिहार में अब डीसीएलआर करेंगे जमीन के कई विवादों की सुनवाई

पटना। डीसीएलआर (भूमि सुधार उप समाहर्ता) फिर से जमीन से जुड़े विवादों की सुनवाई कर सकेंगे। वे किसी विवादित जमीन के बारे में यह तय करेंगे कि इसका वास्तविक मालिक कौन है। इसे टाइटिल सूट या स्वत्ववाद कहते हैं। करीब आठ साल से चल रहे अदालती विवाद में सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद डीसीएलआर को यह अधिकार मिल गया है। इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने गुरुवार को आदेश जारी कर दिया है। मालूम हो कि बिहार भूमि विवादRead More


अंग्रेजी की तरह उदार नहीं हिंदी

प्रो. राजेन्द्र प्रसाद सिंह, अंग्रेजी में मूल शब्द दस हजार हैं और आज साढ़े सात लाख पहुंच गए हैं, यानी कि सात लाख चालीस हजार शब्द बाहर से आए. इसका पता हम लोगों को नहीं है. जैसे अलमिरा को हम लोग मान लेते हैं कि ये अंग्रेजी भाषा का शब्द है, लेकिन वह पुर्तगाली भाषा का शब्द है. इसी तरह रिक्शॉ को हम मान लेते हैं कि अंग्रेजी का है, लेकिन वह जापानी भाषा का है. चॉकलेट को हम मान लेते हैं कि ये अंग्रेजी भाषा का शब्द है, लेकिनRead More


भावनाओं की भाषा हिंदी !

भावनाओं की भाषा हिंदी ! ध्रुव गुप्त आज 14 सितम्बर को हर साल मनाया जाने वाला हिंदी दिवस 1949 में आज ही के दिन भारत की संविधान सभा द्वारा  लिए गए उस निर्णय का उत्सव है जिसमें  भारत की राजभाषा के रूप में देवनागरी में लिखी हिंदी को मान्यता दी गई। उसके साथ शर्त यह थी कि   कि अगले पंद्रह सालों तक हिन्दी के साथ अंग्रेजी भी राजकाज की भाषा रहेगी और बाद में समीक्षा के बाद सिर्फ हिंदी को यह दर्ज़ा दिया जाएगा । ‘हिंदी दिवस’ तब से राजभाषाRead More


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