बिहार कथा
‘उचितवक्ता’ के अनन्य संपादक दुर्गाप्रसाद मिश्र
‘उचितवक्ता’ के अनन्य संपादक दुर्गाप्रसाद मिश्र कृपाशंकर चौबे डॉ. श्रीरमण मिश्र के सौजन्य से मुझे उत्तर उन्नीसवीं शताब्दी के अत्यन्त तेजस्वी समाचार पत्र ‘उचितवक्ता’ की फाइल देखने और समाचार पत्र पढ़ने का सुयोग मिला। पं. दुर्गाप्रसाद मिश्र के संपादन में यह अखबार सात अगस्त 1880 को निकला था। इसका आदर्श वाक्य था, ‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः ‘ यानी इस संसार में ऐसा व्यक्ति मिलना कठिन है, जो आपके हित के लिए भी बोले और उसकी वाणी में कठोरता भी न हो, अर्थात् हितकारी बात मधुरता के साथ प्रस्तुत करनेRead More
आग सुलगाकर चले गये थे मंत्रीजी, बाद में बॉडीगार्ड भी आया
आग सुलगाकर चले गये थे मंत्रीजी ‘दमकल’ देख भड़क गयी रमणिका — बिहार-झारखंड: राजनेताओं की रंगरेलियां 6 — वीरेंद्र यादव, वरिष्ठ पत्रकार, पटना बिहार विधान मंडल की पूर्व सदस्य और लेखिका रमणिका गुप्ता अपनी आत्मकथा में एक सोशलिस्ट नेता और तत्कालीन मंत्री के कार्यव्यवहार और चरित्र को लेकर काफी गंभीर दिखती हैं। उनके मन में नेताजी के प्रति आदर भाव था। रमणिका को लगता था कि मंत्री के प्रति समर्पण करके उनके ‘ऋण’ से मुक्त हुआ जा सकता है। एक घटना का जिक्र करते हुए लिखती हैं कि हजारीबाग कीRead More
पहले कायस्थ सीएम और फिर ब्राह्मण अध्यक्ष ने भोगा
पहले कायस्थ और फिर ब्राह्मण ने भोगा — बिहार-झारखंड: राजनेताओं की रंगरेलियां 5 — वीरेंद्र यादव, वरिष्ठ पत्रकार, पटना बिहार विधान मंडल की पूर्व सदस्य और लेखिका रमणिका गुप्ता अपनी आत्म कथा में देह यात्रा की कई परतों को खोलती हैं। शारीरिक संबंधों को सुरक्षा कवच मानने वाली रमणिका कहती हैं कि देह यात्रा करने वालों में एक बिहार के शीर्ष नेता मुख्यमंत्री और दूसरे बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। एक कायस्थ, एक ब्राह्मण। मुझे ये दोनों एक बहुत बड़ी ढाल की तरह शक्तिशाली और समर्थ संरक्षक के रूपRead More
और मंत्री जी नंगे ‘अवतरित’ हो गये… देह यात्रा के बाद राष्ट्रपति भी बने
– बिहार-झारखंड : राजनेताओं की रंगरेलियां 4 – वीरेंद्र यादव, वरिष्ठ पत्रकार, पटना बिहार विधान मंडल की पूर्व सदस्य रमणिका गुप्ता की आत्मकथा भाषा और शैली के रूप में बेजोड़ है। देह के साथ राजनीतिक घटना और परिस्थिति को जोड़कर रखने के अद्भुत शिल्प की गवाह है पुस्तक। वे जयपुर की एक घटना का जिक्र करते हुए कहती हैं कि देहयात्रा करने वाला व्यक्ति बाद में देश का राष्ट्रपति भी बन गया था। घटना 1962-64 के बीच की है। कांग्रेस का जयपुर सम्मेलन हुआ था। वे बीपीसीसी की तरफ सेRead More
पावरफुल पद पर बैठे कमजोर क्यों साबित हो रहे हैं बिहार विधानसभा के स्पीकर
– स्पीकर पर सीधे-सीधे सवाल उठाना बिहार विधासनभा में नया ट्रेंड मंत्री सम्राट चौधरी ने स्पीकर को व्याकुल नहीं होने की बात कह दी – डिप्युटी सीएम तारकिशोर प्रसाद भी स्पीकर विजय सिन्हा पर आरोप लगा चुके हैं – नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी भी कह चुके हैं कि सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है पटना. बिहार विधानसभा (Bihar Vidhan Sabha) में जिसको मन करता है, वो सीधे-सीधे स्पीकर पर सवाल उठा देता है। दरअसल सदन में कोई भी बात रखने के नियम है। उसका समय भी रहता है। सदन के सदस्य कईRead More
बेटी के लवर को किडनैप कर हाथ-पैर बांधे और गड़ासे से काट डाला
बिहार के समस्तीपुर में आनर क्लिंग बेटी के प्रेम-प्रसंग से नाराज पिता ने युवक को किया अगवा, फिर हाथ-पैर बांधे और गड़ासे से काट कर दी हत्या हत्या करते देख बचाने आई अपनी पत्नी पर भी किया आरोपी ने वार संजीव तरुण,समस्तीपुर. बिहार के समस्तीपुर जिले में बेटी के प्रेम-प्रसंग ने नाराज एक पिता ने उसके प्रेमी युवक की गड़ासे के काटकर हत्या कर दी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार के साथ आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है।Read More
कोयले की काली कमाई से बनती-गिरती थी पटना की सरकार
कोयले की काली कमाई से बनती-गिरती थी पटना की सरकार — बिहार-झारखंड: राजनेताओं की रंगरेलियां 3 — वीरेंद्र यादव, वरिष्ठ पत्रकार, पटना बिहार विधानमंडल की पूर्व सदस्य रमणिका गुप्ता अपनी आत्मकथा में लिखती हैं कि पटना में बनने वाली सरकार में कोयले की काली कमाई की बड़ी भूमिका होती थी। कोलियरी के नेता और ठेकेदारों के हितों के अनुकूल कानून भी बनाये जाते थे। रमणिका गुप्ता ने कोयले के राजनीतिक कारोबार के एक प्रसंग में लिखा है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री दो कारणों से विचलित थीं। एक तो धनबाद के पैसेRead More
महेंदर मिसिर, भिखारी ठाकुर और गांधीजी
महेंदर मिसिर, भिखारी ठाकुर और गांधीजी Nirala Bideaiya आज महेंदर मिसिर की जयंती है। कायदे से उन पर ही बात होनी चाहिए, पर उनका स्मरण करते हुए भिखारी ठाकुर और गांधीजी की भी याद आ रही है । तीनों में एक समानता मिलती है । ये तीन ऐसे नायक होते हैं, जो पुरबिया इलाके में तवायफों को उन्हें उनका सम्मान दिलवाते हैं । मुख्यधारा में समान अधिकार दिलवाने की कोशिश करते हैं । भिखारी ठाकुर का बिदेसिया नाटक तो जानते ही हैं हम सब । उसका मर्म और मूल तोRead More
जब एक गायिका ने महेंद्र मिश्र को उनके ही गायन पर दिया था कि चैलेंज ..
Nirala Bideaiya महेंदर मिसिर कलकत्ता गये | एक गायिका की महफिल में पहुंचे | उस गायिका ने उस शाम महेंदर मिसिर के ही गीतों को सुनाया | वह चेहरे से नहीं जानती थी महेंदर मिसिर को, इसलिए स्वाभाविक तौर पर वह जान न सकी कि श्रोताओं में महेंदर मिसिर भी हैं | लोग वाह-वाह करते रहे | असल में उस गायिका की ख्याति भी महेंदर मिसिर के गीतों को गाने की वजह से तेजी से फैली थी | महेंदर मिसिर पहुंचे भी थे ख्याति सुनकर ही | गायन खत्म हुआRead More
