बिहार कथा
चैत्र शुक्ल नवरात्रि के बारे में जानिए ये बातें
चैत्र शुक्ल नवरात्रि विशेष : ——————————— दरअसल सालभर में दो बार नवरात्रि त्योहार मनाया जाता है। नवरात्रिका मतलब है नौ दिव्य रातें। इस नौ रातें अवधि के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। चूंकि यह नवरात्रि पहले चैत्र मास में आती है, इसलिए इसे चैत्र- नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। चैत्र नव रात्रि को वसंत- नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। यह हिंदू कैलेंडर के पहले दिन को भी चिह्नित करती है।Read More
तेली उत्थान समिति की कार्यकारिणी गठित
तेली उत्थान समिति ने मनाया होली मिलन समिति की कार्यकारिणी गठित, डॉ सुभाष अध्यक्ष, संजय स्वदेश को उपाध्यक्ष व मनोज कुमार की सचिव की जिम्मेदारी संवाददाता, मीरगंज। तेली उत्थान समिति की ओर से होली मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. थाना रोड स्थित अस्पताल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में समिति की कार्यकारिणी का भी गठन किया गया. डॉ सुभाष चंद्र गुप्ता को अध्यक्ष, संजय स्वदेश को उपाध्याय, शिक्षक मनोज को सचिव, बृज किशोर साह को उपसचिव और सुरज साह को सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष चुना गया. इस मौके पर सभीRead More
ऊधो मोहि ब्रज बिसरत नाही
ऊधो मोहि ब्रज बिसरत नाही पंडित अनूप चौबे कंस वध के बाद मथुरा में पहली बार रंगोत्सव का त्योहार मनाया जा रहा है। चारो ओर गीत, ढप, झांझर, और उल्लास का शोर है। निर्द्वन्द्व और अभय के वातावरण में पौधे प्राणी मानव आज खुलकर उत्सव मना रहे पर कृष्ण यमुना के इस पार खड़े होकर उस पार निरंतर निहारे ही जा रहे हैं। ‘उस पार क्या देख रहे हो मित्र? होली नही खेलोगे?’ उद्धव ने कन्हैया कर कंधे पर हाथ रखा। ‘किंचित अब नही मित्र। मेरी होली तो मेरी बांसुरीRead More
कन्यादान को लेकर बहुत संवेदनशील समाज औऱ साधु !
संजय तिवारी किसी गृहस्थ के कंधे पर सबसे बड़ा बोझ होता है कि कन्या का विवाह। यही सबसे बड़ा सुख भी होता है। संसार में जो खुशी कन्यादान से मिलती है वो शायद ही किसी और काम से किसी को मिले। इसलिए भारत का ग्रामीण समाज कन्यादान को लेकर बहुत संवेदनशील होता है। गांव में किसी के लड़की का विवाह हो, वह सबकी लड़की का विवाह हो जाता है। उस निमित्त वह किसी से कुछ सहयोग मांगे तो कोई मना नहीं करता। कन्या के विवाह को भारत के ग्रामीण समाजRead More
स्वरा भास्कर की शादी के बहाने समझे समाज की मानसिकता
स्वरा भास्कर की शादी के बहाने समझे समाज की मानसिकता पुष्यमित्र सच तो यह है कि भले हम सबके हाथ में मोबाइल आ गया है और हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खिलौने से खेलना सीख गए हो मगर ज्यादातर भारतीय आज भी मानसिक तौर पर मध्यकालीन युग में ही अटके। मध्यकालीन युग यानी युद्ध, बर्बरता और लूट खसोट। जब एक राज्य या एक देश या एक कबीला दूसरे पर हमले करता और लूटपाट मचाता। जीतने वालों का हक था कि वह पराजित समाज का सबकुछ छीन ले। धन भी और स्त्रियांRead More
साउथ की वह पहली हीरोइन, जिसकी फ़िल्म रिलीज होते ही लोग हो गए थे हिंसक
आज गूगल डूडल ने पीके रोज़ी को सम्मानित किया, जो मलयालम सिनेमा में पहली अभिनेत्री थीं. उन्हें पर्दे पर देखते ही सिनेमा हॉल के पर्दे पर पत्थर फेंके गए. कुर्सियां तोड़ी गईं और बाद में हिंसक भीड़ ने उनके घर को आग के हवाले कर दिया. हिंसा का मूल कारण के था जाति. सवर्ण जातियों में गुस्सा था कैसे एक पिछड़ी जाति की लड़की अभिनेत्री बन सकती और अभिनेत्री बनकर रुपहले पर्दे पर नायर जाति की महिला का किरदार निभा सकती है. स्वतंत्रता दौर के केरल में साल 1928 मेंRead More
इसलिए है रैदास को और शिद्दत से पढ़ने, समझने की जरूरत
सुभाषचंद्र कुशवाहा रैदास जयंती पर उन्हें और शिद्दत से पढ़ने, समझने की जरूरत है। उन्हें “रविदास” कहने के कुचक्र से भी बचना है। संत रैदास का नाम अपने लाभ- हानि के लिए लेते हुए, उन्हें दैवीय चमत्कारों में उलझा कर वर्णवादी कर्मकांडों में समाहित कर लेने का कुचक्र, इस धरती पर पसरे बहुजन विरोधी अमानवीय संस्कृति का मूल है. रैदास प्रिय हैं तो ऊँच-नीच, वर्णवाद का निषेध हो, उसके लिए संघर्ष हो अन्यथा किसी तप, तपस्या, पूजा -पाठ से रैदास का क्या काम ? मध्यकालीन भारतीय संत परम्परा, अकर्मण संस्कृतिRead More
जनमानस के संत कवि संत शिरोमणि रैदास
पवन कुमार, शोध छात्र, गोरखपुर विश्विद्यालय गोरखपुर भारतीय मध्यकालीन परिवेश में संस्कृति, धर्म और भाषा की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ मोटे तौर पर द्विस्तरीय रही हैं |भारतीय मध्यकालीन परिवेश सत्ता संघर्ष के साथ-साथ संस्कृति, धर्म और भाषा के आपसी द्वन्द का भी समय रहा। इसी की अभिव्यक्ति के रूप में निर्गुण और सगुण काव्यधारा दिखती है| दोनों ही काव्यधाराओं के कवियों की सामाजिक दृष्टि में अन्तर दिखाई देता है, इसके बावजूद वे सामाजिक और राजनीतिक सत्ता और संरचना से टकराती हुई साहित्यिक अभिव्यक्तियाँ करते हैं । भक्तिकाल के निर्गुण संत परम्परा एकRead More
विकास कार्यों के लिए प्रतिबद्ध हैं बच्चा पांडेय
विकास कार्यों के लिए प्रतिबद्ध हैं बच्चा पांडेय —- एक संवाद जनप्रतिनिधि के साथ- 4 – —- वीरेंद्र यादव न्यूज —— सीवान जिले के बड़हरिया से राजद के विधायक हैं बच्चा पांडेय। मूलत: कारोबार से जुड़े रहे बच्चा पांडेय पहली बार लोजपा के टिकट पर बड़हरिया से चुनाव में उतरे थे और पराजित हुए थे। 2020 के फरवरी महीने में वे राजद में शामिल हुए और नंवबर 2020 में उसी सीट से राजद के विधायक निर्वाचित हुए। अपनी राजनीतिक यात्रा के संबंध में उन्होंने कहा कि उनके भाई टुनजी पांडेयRead More
भाजपा के लिए ‘वोट बाजार’ नहीं हैं जगदेव प्रसाद
भाजपा के लिए ‘वोट बाजार’ नहीं हैं जगदेव प्रसाद सम्राट चौधरी को नेता मान पायेंगे कोईरी? —- वीरेंद्र यादव —– बिहार की राजनीति में दो शब्द का काफी मायने है। पहला शब्द है वोट बाजार और दूसरा शब्द है वोट का ट्रेंड। पहले का अर्थ है किसके नाम पर किस पार्टी को वोट मिलता है और दूसरे शब्द का अर्थ है कि किसके साथ वोट जाता है। एक सप्ताह पहले 24 जनवरी को जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनायी गयी थी। उनकी जयंती जदयू, राजद समेत भाजपा ने भी धूमधामRead More
