आफिस गफूर के आगे फेल होगा वोट ‘साधु’ का गेम प्लान

गोपालगंज विधानसभा में असली लड़ाई महागठबंधन के आसिफ गफूर और एनडीए के सुबाष सिंह के बीच

विशेष संवाददाता. गोपालगंज.
गोपालगंज विधानसभा क्षेत्र से लालू प्रसाद के साले और यहां के पूर्व सांसद व विधायक अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव चुनावी मैदान में आने से उनके गिने चुने समर्थकों का समूह यह कयास लगा रहे हैं कि असली लड़ाई इन्हीं के साथ है. लेकिन ग्राउंड की हकीकत यह है कि असली लड़ाई अभी भी महागठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी आसिफ गफूर और एनडीए के घटक दल भाजपा के सुबाष सिंह के बीच ही है. एक ओर जहां सुबाष सिंह के लगातार 15 साल के विधायक और जनता के बीच लगातार अनुपस्थिति के कारण उनके खिलाफ एक एंटी इंकंबेंसी है. यहां के दलित, पिछड़े और अति पिछड़े समाज के लोग सुबाष सिंह के अहमं से उब चुके हैं. वे बदलाव के मूड में हैं. लेकिन उनके सामने हर बार विकल्प में रूप में रियाजुल हक राजू के आने जाने से हिंदू मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण कर बाजी मारते रहे हैं. लेकिन इस बार हिंदू मुस्लिम धुव्रीकरण को लेकर सुबाष सिंह की दाल गलने की गुंजाई कम है. बीते शुक्रवार को थावे के हरदिया में सुबाष सिंह के काफिल पर कुछ लोगों के हमले से सुबाष सिंह के समर्थकों ने इसे मजहबी रंग देने की कोशिश की लेकिन समर्थकों का दांव फेल हो गया. आसिफ गफूर में
बड़ी ही बेबाकी से यह कहते हैं कि जब जनता को कुछ बताने के लिए या दिखाने के लिए नहीं होता है तो इस तरह से आसान दांव चले जाते हैं, लेकिन जनता अब पहले से ज्यादा जागरुक हो चुकी हैं और चीजों को समझने लगी हैं. इस तरह के ध्रुवीकरण का दाव आसिफ गफूर पर नहीं चला पा रहे हैं क्योंकि आसिफ गफूर स्वतंत्रता सेनानी और बिहार के पहले मुस्लिम मुख्यमंत्री आसिफ गफूर के पोते हैं. इन्होंने लाख विरोध और मुश्किलों का समाना करते हुए धर्मनिरिपेक्ष भाव से जनता की न केवल सेवा की साथ ही गोपालगंज जिले की स्थापना में भी सबसे अहमं रोल निभाया. आसिफ गफूर को जिस तरह से पब्लिक के बीच में रिस्पान्स मिल रहा है, उसको देखते हुए साधु के सपने पर पानी फिर सकता है. रही सही कसर 28 अक्टुबर को जाधवपुर में आयोजित तेजस्वी यादव की राजनीतिक जनसभा ने पूरी कर दी. इस सभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने अपने मामा अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव पर तंज कसते हुए उनका बिना नाम लिये कहा कि आप लोग किसी कानफुकुवा के चक्कर में बंट मत जाना. लोग इधर से भी खाएंगे और उधर से भी खायें हैं. हम किसी का नाम नहीं लेंगे आपलोग समझते हैं और सब होशियार हैं. दातुन के चक्कर में पूरा वृक्ष मत उखाड देना. कोई कितना हवा पानी दे बंटना नहीं. कुछ लोग चुनाव आते ही जागरूक हो जाते हैं. बस उन्हें चुनाव लडना है. तेजस्वी यादव ने कहा कि आप लोग किसी के चक्कर में पडिएया मत, बटियेगा मत. तेजस्वी यादव ने कहा कि हम दूरबीन लगाए हुए हैं. सरकार हम बनाने जा रहे हैं. लेकिन ऐसे लोगों पर भी नजर है. याद रहे पार्टी से कोई गद्दारी नहीं करेंगा. कांग्रेस से भी राजद ही लड रही है. गोपागलंज से आसिफ गफूर साहब नहीं हम चुनाव लड रहे ह़ैं. हम लोग सब चीज पर नजर रखे हैं.
दरसअल, आरजेडी शासनकाल में साधु यादव का सिक्का चला करता था. ऐसा कहा जाता है कि जब लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती की शादी थी, तब बारातियों को नई गाड़ी से लाने के चक्कर में साधु ने राजधानी में गाड़ियों के शोरूम से रातों-रात गाड़ियां उठवा ली थीं. यही नहीं, फर्नीचर की जरूरत पड़ी तो नाला रोड के फर्नीचर की सभी दुकानों का फर्नीचर शादी स्थल पर मंगवा लिया था. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए तेजस्वी यादव ने अपने मामा पर निशाना साधा है. बता दें कि तेजस्वी यादव के मामा साधु यादव गोपालगंज विधानसभा सीट से बसपा के प्रत्याशी हैं

पहले बैकुंठपुर से लड़ने की थी साधु की तैयारी
साधु यादव ने आसिफ गफूर को काफी हल्के में लेकर गोपागलंज के चुनावी मैदान में ताल ठोक दिया. हालांकि उनकी तैयारी पहले बैकुंठपुर से लड़ने को लेकर थी. लेकिन उन्होंने आसिफ गफूर को हल्का प्रत्याशी समझ कर गोपालगंज से नॉमिनेशन कर दिया. लेकिन जमीन पर जनसंपर्क करते वक्त साधु यादव का शायद इस बात का अहसास हो चुका है कि उनका सपना चूर होगा और वे फिर इस बार वोट करवा साबित होंगे. अपने सपने पर पानी फिरता देख साधु यादव ने जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और टिकट नहीं मिलने के बाद बागी कांग्रेस के बागी सुभाष सिंह कुशवाहा को अपने पक्ष में कर गांव गांव घूम रहे हैं.

क्या रियाजुल हक के साथ साधु का है समझौता
इसके साथ ही साधु यादव ने एक पॉलिटिकल गेम प्लान भी तैयार किया है. गुप्त सुत्र बताते हैं कि साधु यादव वे बरौली के राजद के उम्मीदवार रियाजुल हक राजू के एक गुप्त समझौता कर एक दूसरे को मदद करने पर सहमति बनाई है. साधु ने रियाजुल हक से कहा कि वे अपने मुस्लिम समाज में साधु यादव के समर्थन में मदान के लिए प्रेरित करें और वे यादव समाज को बरौली में उनके पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित करेंगे. इसमें कितनी सच्चाई है या यह कयास अथवा अफवाह है यह तो ये दोनों लोग ही जानें, लेकिन राजनीतिक के जानकार यह कह रहे हैं कि साधु यादव के साथ केवल उन्हीं लोगों का समर्थन हैं जो उनके सत्ता में रहने उनसे लाभ लिये थे. वे ही अपने गांव से लोगों को बटोर कर उनके जनसंपर्क में ला रहे हैं. साधु यादव को लेकर चर्चा केवल जिले के शहरी क्षेत्र में ही है. मुस्लिम यादव वोट पूरी तरह से एक साथ महाठबंधन के प्रत्याशी आसिफ गफूर के पाले में ही गिरेगा. इसके साथ ही अति पिछडा और पिछडे वर्ग के अनेक समाज के लोग भी महागठबंधन के साथ रहेंगे.

सुबाष सिंह को क्यों वोट दें ब्राह्मण समाज
ब्राह्मण समाज के लोग भी आसिफ गफूर के व्यक्तिव व उनकी शालिता से प्रभावित होकर उन्हें पक्ष में मतदान कर इन्हें एक मौका देने का मन बना रहे हैं. इसका एक कारण यह भी है कि राजपूत समाज के लोग बैकुंठपुर में मिथिलेश तिवारी के खिलाफत कर रहे रहे हैं तो फिर गोपालगंज में सुबाष सिंह के प्रति वे अपना समर्थन कैसे दिखा सकते हैं. वैसे भी सुबाष सिंह और मिथिलेश तिवारी में छत्तीस का आंकडा चलता है. कुछ मिला कर लबोलुआब यह है कि साधु यादव गोपालगंज में अपने राजनीतिक गेम प्लान में फेल होंगे और सुबाष सिंह और साधु का राजनीतिक हथकंडा आसिफ गफूर के व्यक्तित्व व उनकी विद्वता के आगे पूरी तरह से फेल हो सकती है. जैसे जैसे चुनाव प्रचार का राजनीतिक रंग चढ़ता जा रहा है, वैसे वैसे मुकाबला रोचक बनाता जा रहा है. हार या जीत किसकी होगी यह जनता तय करेगी.






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