बिहार कथा

 

5-5 ब्राह्मण-भूमिहार विधान पार्षदों का मई में टर्म हो रहा है पूरा

वीरेंद्र यादव बिहार विधान परिषद के 27 सदस्यों का कार्यकाल आगामी मई महीने में पूरा हो रहा है। जिन सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें से कुछ की पुनर्वापसी भी संभव है। कार्यकाल पूरा कर रहे 27 सदस्यों में ब्राह्मण और भूमिहार जाति के 5-5 सदस्य हैं। यादव विधान पार्षदों की संख्या 3 है। इसके अलावा कायस्थ, मुसलमान और कुर्मी सदस्यों की संख्या 2-2 है। जबकि राजपूत, बनिया, धानुक, पासी, पासवान, तुरहा, पनेरी और बिंद सदस्यों की संख्या एक-एक है। कार्यकाल पूरा करने वाले सदस्यों की जातिवार सूचीRead More


…यहां के बच्चों का डर कहीं वे मर्दाना कमजोरी के शिकार तो नहीं हो जाएंगे

Vineet Kumar के फेसबुक टाइमलाइन से साभार हिन्दी पट्टी में पैदा हुए अधिकांश बच्चे दसवीं- बारहवीं तक या तो खुद समाज विज्ञान या कला पढ़ना नहीं चाहते और गर चाहें भी तो उनके मां-बाप की इज्ज़त चली जाती है. खासकर लड़कों को तो इस बात का भी डर सताता है कि ये सब पढ़कर कहीं आगे चलकर मर्दाना कमजोरी के शिकार तो नहीं हो जाएंगे ? दहेज की रेट वहीं से स्खलित होने लग जाती है. इस पट्टी से आए लोगों के लिए साइंस पढ़ना रूचि से कहीं ज्यादा सोशलRead More


बिहार की हिडेन हिस्ट्री : अंगुलिमाल परित्त

अंगुलिमाल परित्त पुष्यमित्र के फेसबुक टाइमलाइन से साभार यतो हम भगिनी अरियाय जातियो जातो नभि जानामि सनसिक्का पणाम जीविता वोरोपिता। तेना सक्केना सोत्ति ते होतु गबभासा। अर्थ- हे बहन, मैंने इस नए जन्म अपनी जानकारी में किसी का अहित नहीं किया है। इसलिये तुम्हारा दुख दूर होगा और तुम्हारे गर्भ में पल रहे शिशु का भी। थेरवाद(हीनयान) बौद्धों के घर में जब शिशु का जन्म होने वाला होता है, तब कोई भिक्खु आकर यह मंत्र गर्भवती स्त्री को कहता है। भावना यह होती है कि गर्भवती स्त्री का कष्ट दूर होRead More


बिहार की हिडेन हिस्ट्री : प्रज्नतारा- प्रज्ञतारा

बिहार की हिडेन हिस्ट्री :  प्रज्नतारा- प्रज्ञतारा पुष्यमित्र के फेसबुक से साभार यह पांचवीं सदी की बात है। एक अनाथ युवती पूर्वी भारत की गलियों में भटकती थी। बौद्धों के 26वें गुरू पुण्यमित्र की निगाह उस पर पड़ी। पुण्यमित्र को उस युवती में प्रज्ञा नजर आयी, उन्होंने उसे शिक्षा दी। अपना उत्तराधिकारी बनाया और इस तरह प्रज्ञतारा बौद्धों की 27वीं गुरू और संभवतः पहली महिला गुरू बनी। हालांकि कई लोग इस बात को गलत बताते हैं कि प्रज्ञतारा महिला थी। मगर कई लोगों ने प्रज्ञतारा पर खूब शोध किया, इनमेंRead More


आदिवासियों की कला, संस्‍कृति एवं विकास के लिए छत्‍तीसगढ़ सरकार प्रतिबद्व

– तीन दिवसीय राष्‍ट्रीय शोध संगोष्‍ठी के दूसरे दिन मुख्‍यमंत्री व केबिनेट मंत्री भी हुए शामिल संवाददाता रायपुर । प्रदेश के मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल ने आदिवासियों के विकास और उत्‍थान के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया कि छत्‍तीसगढ सरकार ने कहा कि आदिवासियों के प्रतिनिधित्‍व के रुप में सरकार में 4 आदिवासी कैबिनेट मंत्री बनाए हैं। श्री बघेल ने कहा कि हमारी सरकार आदिवासियों का भौतिक विकास के प्रोफेशनल तरीके से विकास के लिए सोचते हैं। ताकि वे वर्तमान समय के साथ जुड़कर सांसकृतिक मूल्‍यों पर आधारितRead More


बिहार की हिडेन हिस्ट्री : कौण्डिन्य- फुनान वंश का संस्थापक

कौण्डिन्य- फुनान वंश का संस्थापक पुष्यमित्र के फेसबुक timeline से साभार प्राचीन भारत के इतिहास में कई कौण्डिन्य का जिक्र मिलता है। एक कौण्डिन्य उन सात ब्राह्मणों में से एक था जिसने राजकुमार सिद्धार्थ के गौतम बुद्ध होने की भविष्यवाणी की थी और बुद्धत्व प्राप्त होने पर वह सबसे पहले उनका शिष्य बना। उसके साथ के चार अन्य शिष्य उसी की प्रेरणा से गौतम बुद्ध के शिष्य बने थे। हालांकि इतिहास इसके आगे उस कौण्डिन्य के बारे में कुछ नहीं बताता। मगर यहां हम उस कौण्डिन्य के बारे में बातRead More


बिहार की हिडेन हिस्ट्री : आजीवक-मक्खलि गोसाल

आजीवक-मक्खलि गोसाल पुष्यमित्र के facebook  से  ईसा मसीह के चरनी में जन्म लेने से अमूमन 520-30 साल पहले मगध में मक्खलि गोसाल ने अपनी गुहाल में जन्म लिया था। बाद में वह आजीवक सम्प्रदाय का सबसे बड़ा दार्शनिक साबित हुआ। उसके द्वारा स्थापित यह सम्प्रदाय उसकी मृत्यु 15-16 सौ साल बाद तक चलता रहा। यह उस मगध की धरती का सबसे बड़ा संत था, जो एक जमाने में गौतम बुद्ध और वर्धमान महावीर की ज्ञान की तलाश की भूमि रही है। वह मगध जो व्रात्यों और वेद, यज्ञ विरोधी निरीश्वरवादीRead More


नीम के पौधों की हो मजबूत घेराबंदी

बिहार सरकार ने यह निर्णय किया है कि वह शहरों में सड़कों के किनारे पीपल,नीम, कदम्ब और जामुन के पौधे लगाएगी। यह बहुत अच्छी बात है। पर्यावरण संतुलन के लिए पीपल और नीम का तो खास महत्व है। पर, नीम को लेकर कुछ अधिक ही सावधानी बरतने की जरूरत पड़ेगी। उसके पौधों की मजबूत और ऊंची घेराबंदी होनी चाहिए। एक बार पटना के एक मुहलले में नीम के पौधे लगाए गए थे। पर, वे जैसे ही थोड़ा बड़ा हुए,उन पर अत्याचार शुरू हो गए। कोई दतवन के लिए डाल तोड़नेRead More


बिहार की हिडेन हिस्ट्री : संघमित्ता-संघमित्रा

Bihar Katha

संघमित्ता-संघमित्रा पुष्यमित्र, फेसबुक से साभार श्रीलंका में दिसंबर महीने के पूर्णिमा की तिथि को एक पर्व मनाया जाता है, उदुवापा पोया. पोया का आशय संभवतः पूर्णिमा से ही है. क्योंकि वहां हर महीने की पूर्णिमा तिथि को कोई न कोई पोया पर्व मनाया जाता है. हर पोया पर्व बौद्ध धर्म से संबंधित है. उदुवापा पोया पर्व जो साल का आखिरी पर्व है, उसे एक और नाम से भी पुकारा जाता है, संघमित्ता डे. संघमित्ता डे यानी संघमित्ता दिवस. संघमित्ता मने संघमित्रा, दुनिया के सर्वकालिक महान राजा में से एक अशोकRead More


बिहार : एक गांव, जहां मांस मछली लेकर प्रवेश वर्जित, खा कर आने पर नहाना भी पडेगा

बिहार के इस शाकाहारी गांव की अजीब है परंपरा, मांसाहार को हाथ भी नहीं लगाते लोग, जानिए नवादा [अमरेंद्र मिश्रा]। नवादा के नारदीगंज प्रखंड की डोहड़ा पंचायत के मोतनाजे गांव के बाशिंदे शाकाहारी हैं। गांव के किसी भी घर में मांस-मछली लेकर प्रवेश करना वर्जित है। यहां सदियों से ये परंपरा कायम है। अब नई पीढ़ी भी पुरखों की व्यवस्था को जिंदा रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। तकरीबन एक हजार की आबादी वाले इस गांव में 70 से 80 घर हैं। यहां पिछड़े तबके के बाशिंदे रहते हैं, लेकिन इनकीRead More


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