बिहार कथा

 

भगवान बुध्द को समझना है तो यह पढ़िए

बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष साधुवाद-धम्म्प्रभात *बुध्द को पढने के बाद आप जरुर चिकित्सा करना शुरु करोगे!* बुध्द ने ऐसे धम्मं को जन्म दिया, जिसमे ईश्वर की कोई जगह नहीं है। जिसमे परमात्मा को कोई स्थान नहीं है। बुध्द ने संदेह से शुरू की यात्रा और शून्य पर पूर्ण की। संदेह और शून्य के बिच में बुध्द का सारा बोध है। संदेह को धम्मं का आधार बनाया और शून्य को धम्मं की उपलब्धि। बाकी सब धर्म विश्वास को आधार बनाते है और पूर्ण को उपलब्धि। बुध्द धम्मं को समझने के लिएRead More


कोरोना काल में मजदूरों के कल्याण का रास्ता

कोविड-19 महामारी और प्रवासी श्रमिक मनोज कुमार नॉवेल कोरोनावायरस जनित बीमारी कोविड-10 समस्त मानवजाति के लिए एक चुनौती बन के आया है। आज पूरा विश्व इस महामारी से संघर्ष कर रहा है। भारत भी इस बीमारी से अछूता नहीं है। जानकारी मिलने तक करीब 44000 लोग इस बीमारी से ग्रसित हो चुके थे। इस बीमारी से बचने के लिए सभी लोग अपने घरों में कैद हैं। केवल आवश्यक सेवाओं और आपूर्ति की दुकाने ही खुली हुई है। बंदी का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित प्रवासीRead More


सरकार के नकारापन का अभिशाप झेल रहे बिहार के विद्यार्थी

कोटा से अमरेंद्र पटेल लो भाई, मैं कोटा आ गया। वही कोटा जहां हजारों छात्र इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी के लिए हर साल आते हैं। कोचिंग करते हैं। कुछ सफल होते हैं और अधिकतर विफल होकर अपने राज्य और घर-परिवार को लौट जाते हैं। सभी हिंदी प्रदेशों के छात्र-छात्राएं कोचिंग के लिए आते हैं। सपनों की यह अनंत यात्रा वर्षों से चली आ रही है। लेकिन इस साल यह यात्रा थम-सी गयी है। हर कोई यात्रा बीच में छोड़कर अपने परिवार के पास लौटना चाहता है। ऐसे छात्रों कीRead More


दूर करनी है बिहार की बदहाली, पहले समझें यह कहानी

हे बिहार के भाग्य विधाता! सुन लो मेरी पुकार श्रीधर पाण्डेय , पटना। किसी भी राष्ट्र में अमन, चैन, खुशहाली एवं शांति का वातावरण तब तक तैयार नहीं हो सकता, जब तक उस समाज में बेरोजगारी जैसी बीमारी की जड़ बढ़ती ही जा रही हो।आज हम अन्य ग्रहों पर जाने एवं वहाँ की जानकारी के लिए लालायित जरूर है लेकिन हमारा एक समाज रोटी से भी ज्यादा गरीब है इस बात को भूल जा रहे हैं।आर्थिक असमानता ही समाज में अपराध को जन्म देती इस बात से इनकार नहीं किया जाRead More


अखबार मरेंगे तो लोकतंत्र बचेगा?

अरुण कुमार त्रिपाठी हम गाजियाबाद की पत्रकारों की एक सोसायटी में रहते हैं। वहां कई बड़े संपादकों और पत्रकारों(अपन के अलावा) के आवास हैं। इस सोसायटी में एक बड़े पत्र प्रतिष्ठान के ही पूर्व कर्मचारी अखबार सप्लाई करते हैं। वे बताते हैं कि कोरोना से पहले लोग तीन- तीन अखबार लेते थे। अब कुछ ने अखबार एकदम बंद कर दिया है और कुछ ने घर में लड़ाई झगड़े के बाद एक अखबार पर समझौता किया है। एक दिन पहले एक बड़े अखबार के बड़े पत्रकार ने बताया कि उनका वेतन एकRead More


प्लेग से लड़ते हुए शहीद हुई थीं सावित्री फुले

अरुण कुमार त्रिपाठी कोरोना महामारी के दौरान जातिवादी छुआछूत और सांप्रदायिक बुराइयों के वापस आने का खतरा है। तब्लीगी जमात का मामला तो राजनीतिक संरक्षण में उछल गया लेकिन यह कहने वालों की कमी नहीं है कि पिछली सदी की छुआछूत की प्रथा इसी प्रकार की बीमारियों का संक्रमण रोकने के लिए थी। ऐसे माहौल में महात्मा ज्योतिबा फुले की पत्नी और स्त्री चेतना की प्रणेता सावित्री बाई फुले ने जिस तरह प्लेग और जातिवाद से लड़ते हुए अपना बलिदान दे दिया वह आज भी प्रेरणा देता है। 1897 वहRead More


बिहार के राजनीतिक इतिहास के एक अनोखे नायक की कहानी जिसने तोडा बिहार में पर्दा प्रथा

निराला विदेशिया आज 28 अप्रैल है। ऐतिहासिक दिन। पूरे देश के लिए। बिहार के लिए तो और विशेष। 1928 का साल था। आज ही की रात थी,जब बिहार का एक नौजवान अपनी नवविवाहिता पत्नी को, उसके 14 माह के बच्चे के साथ,पत्नी के मायके से लेकर निकल गया था। गया जिले के एक सुदूर गांव मंझवे से। वह नौजवान कोई और नही, रामनन्दन थे। बिहार के राजनीतिक इतिहास के एक अनोखे नायक। शाश्वत विद्रोही नायक। हुआ यह था कि गांधी जी दरभंगा आये। दरभंगा आये तो उन्होंने देखा कि महिलाएंRead More


मजदूरों के लिए एक वक्त उपवास रखने वाली मुखिया

बिहार कथा, संवादाता, गोपालगंज। सम्पूर्ण विश्व जब कोरोना महामारी से मुकाबला कर रहा है, समाज का हर व्यक्ति एक दूसरे की क्षमतानुसार मदद कर रहा है|इस दौर में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है | जैसा कि पिछले दिनों “पंचायती राज दिवस” के अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों के कुछ पंचायत प्रतिनिधियों से संवाद के क्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बताया |पंचायत व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई है… जहाँ लोगों का जीवन करीब से जुडा़ है, मुसीबत में सबसे पहले लोग अपने मुखिया के पासRead More


पत्रकारिता का नया मदारी अरनब गोस्वामी, जानिए इसकी कुंडली

श्याम मीरा सिंह अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक चैनल 6 मई 2017 के दिन पत्रकारिता के बाजार में एक नए मदारी की एंट्री होती है। मदारी अर्नब, दुकान का नाम ‘रिपब्लिक’। आप रिपब्लिक टीवी के बारे में कुछ याद कीजिए- पहले दिन – लालू प्रसाद यादव और शहाबुद्दीन की बातचीत की स्टोरी ब्रेक की जाती है। दूसरे दिन – आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक कपिल मिश्रा को लांच किया जाता है जो आम आदमी पार्टी में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर 2 करोड़ की घूसखोरी का सनसनीखेज आरोप लगाता है।Read More


लॉकडाउन का भयावह सच और बिहार की बदहाली

निशिकांत ठाकुर वर्तमान में पूरे देश में विकट स्थिति पैदा हो गई है। देश लॉकडाउन है, यानी आवाजाही ही नहीं, हर गतिविधि बंद। ऐसे में घर में कैद होने के कारण मन भावुक हो रहा है। इसलिए जब अपनों की याद सताती है, तो दिल उद्वेलित भी होने लगता है। कोई भी शिकायत सुननी हो या देखनी हो तो सबकी नजर अपने आप बिहार की ओर उठ जाती है। कोई-न-कोई कारण तो है जिसकी वजह से हर छोटी-बड़ी बात के लिए सबकी नजर घूमकर बिहार पर ही अटक जाती है।Read More


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