रामविलास की राजनीतिक

संजीव चंदन

रामविलास जी की सक्रियता देख दिल खिल जाता है-क्या ठसक है बंदे में। लगभग 5 साल तक सत्ता का सुख लेने के बाद जब मन बना लिया कि इनसे अलग होना है तो जेपीसी की मांग के साथ सीना तान खड़े हो गये। रामविलास जी के इस तनने ने 56 इंच के सीने में हलचल पैदा कर दी। यह अकारण नहीं है कि भूपेंद्र यादव भागे-दौड़े पहुंचे पासवान जी के घर अन्यथा तो जब उपेंद्र जी ने आंख तरेरी थी तो 56 इंच की छाती का एक बाल भी नहीं हिला था। उन्हें खुद ही भूपेंद्र जी के घर दस्तक देना पड़ा था।

हालत यह कि स्वघोषित चाणक्य ने भी पासवान जी के साथ बैठक कर ली। समझाने के लिए जेटली भी धमके। नीतीश बाबू डैमेज कंट्रोल के लिए पहुंच रहे हैं। क्या बात है? ऐसा भाव बढ़ा रहे हैं कि जिधर भी जायेंगे चांदी-चांदी। एनडीए मे रहे तो भी और बाहर हुए तो भी। जरूरत पड़ी तो पोस्ट पोल पलट लेंगे।

जिय हो बिहार के लाला- रामविलास जी ने राजनीति में तरंग पैदा कर दिया है। इस अंगड़ाई को सिर्फ रामविलास जी का निजी निर्णय न समझें यह भाजपा के भीतर की हलचलों का भी एक बाहरी प्राकट्य है। चुनाव के बाद गठबंधन का पुख्ता दौर आने का संकेत भी है यह और भीतरिया खेल में मोदी मैजिक का गडकरी-राजनाथ विकल्प का संकेत भी। वैसे चाहे जो हो रामविलास जी से अपना गहरा रिश्ता है। किसी ने कभी गलिआया था मुझे- ‘ आप दिखते भी रामविलास पासवान जैसे हैं और चूतिया भी रामविलास पासवान जैसे हैं।’ मुझे ठसक से भरे इस चूतियापे से प्यार है।

{from the facebook timeline of sanjeev chandan}






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