जनक राम और बिनोद सिंह का अवसर झपट ले गए मिथलेश तिवारी!

क्या अस्थि कलश की शुद्धता बचाए रखने के लिए मंगल पांडे ने मिथलेश तिवारी के हाथ ही सौंपा कलश
 
नए विधायक पाषर्द आदित्य नारायण पांडे व नए विधायक मिथलेश तिवारी वोट पर, क्यों नहीं बैठने दिया गया सांसद जनक राम व सीनियर विधायक सुभाष सिंह को 
 
बिहार कथा. विशेष संवाददाता, गोपालगंज. पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थी कलश को गोपालगंज के नारायणी नदी में विसर्जन के दौरान जिले के सांसद जनक राम और भाजपा के जिला अध्यक्ष बिनोद कुमार सिंह को वह श्रेय सम्मान नहीं मिला जो मिलना चाहिए. यह हमारा नहीं जिले की पब्लिक का कहना है. पटना से अस्थी कलश लेकर गोपालगंज के प्रभारी व प्रदेश के स्वास्थ मंत्री मंगल पांडे चले. गोपालगंज में इस काफिले को जिला अध्यक्ष बिनोद सिंह ने रिसीव किया. लेकिन जब नारायणी नदी में इसे विसर्जित करने का मौका आया तो इसे मंगल पांडे ने मिथलेश तिवारी के हाथ में दिया. राजनीति में यही चीजें मायने रखती है. वरिष्ठों ने किसका पहले नाम लिया, किसको ज्यादा सम्मान दिया. इसे से राजनीतिक कद भी तय होते हैं. इस वाक्ये को जिले के कुछ लोग इस नजरिए से देख रहे हैं कि मंगल पांडे ने पवित्र अस्थी कलश की शुद्धता को बनाए रखने के लिए ही मिथलेश तिवारी के हाथों में सौंपा. जबकि  होना तो यह चाहिए था कि यह अस्थी कलश जिला अध्यक्ष बिनोद कुमार सिंह के हाथ या फिर जिले के सांसद जनक राम के हाथ में सौंपा जाना चाहिए था. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
सारण के माझी विधानसभा में जब अस्थी कलश विसजित करने की बात आई थी तो वहां के सांसद जर्नाद्धन सिंह सिग्रिवाल के हाथों में सौंपा गया.इसी तरह से अन्य जगह पर जहां जहां अस्थी कलश विसर्जित करने की बात थी वहां—वहां जिले के अध्यक्ष व वहां के सांसदों के हाथ यह कलश जल में प्रवाहित हुई. लेकिन गोपालगंज में ऐसा नहीं हुआ. यहां नदी के मुहाने पर मंगल पांडे ने अस्थी कलश मिथिलेश तिवारी के हाथ में सौंपा.
गोपालगंज में अस्थी विसर्जन के लिए वोट पर मिथलेश तिवारी के साथ आदित्य नारायण पांडे, जर्नाद्धन सिंह सिगरिवाल व बिनोद सिंह बैठे. जिले में आदित्य नारायण पांडे और मिथलेश तिवारी पहली वार एमएलसी व विधायक चुने गए हैं. ऐसी बात नहीं है कि जिले में पार्टी के सीनियर विधायक नहीं है. बताया जा रहा है कि इस वोट में जनक राम को बैठने के लिए नहीं पूछा गया. वोट नदी में पहुंची तब उसे विसर्जित करनेक दौरान रोक दिया गया. जब वह कलश से अस्थी प्रवाहित करने लिए कलश को नदी में मिथलेश तिवारी ने उडेला तो उसे जनार्दधन सिंह सिगरिवाल ने मिथलेश तिवारी का हाथ स्पर्श कर लिया. मिथलेश तिवारी के ऐतिहासिक क्षण को यादगार बनाने के लिए जिला अध्यक्ष बिनोद सिंह मोबाइल से फोटो खींचने का दायित्य संभाल रहे थे. इससे बिनोद सिंह के करीबी कार्यकर्ता भी इस बात से खासे नाराज हैं कि उनके जिला अध्यक्ष को विधायक मिथलेश तिवारी ने फोटो खींचने के काम में लगा दिया. जब वोट पर जिला अध्यक्ष थे तो उनको अस्थी विसर्जन का अवसर सम्मान मिलना चाहिए था.
क्या कहते हैं बिनोद सिंह
इस प्रकरण में जब बिनोद सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है. वोट पर बैठने के लिए चार लोगों की ही जगह थी. वोट हल्की थी. यदि सब लोग झुकते तो वोट डगमगा जाती. वे किनारे बैठे थे, इसलिए फोटो खींच लिया.
 
क्या कहते हैं जनक राम 
सांसद जनक राम से जब यह पूछा गया कि अटल बिहारी बाजपेयी की अत्येठी कलश को आपके हाथ में सौंपने के बजाय मंगल पांडे ने मिथिलेश तिवारी को सौंपा और आप वोट में भी जाने का मौका नहीं मिला, कैसा लग रह है, तो जनक राम ने कहा—इसमें कोई दुखी होने वाली बात नहीं है, सब लोग मिलजुल कर काम करते हैं. जब जनक राम से बिहार कथा ने यह पूछा कि इससे दलित बहुजन समाज में यह संदेश गया है कि एक ब्राह्मण मंत्री ने ब्राह्मण विधायक के हाथ में अस्थी कलश सौंप कर आपकी उपेक्षा की है, इस पर उनका कहना था कि पब्लिक में जो संदेश जाता है, वही ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.
क्या कहते है नित्यानंद राय
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय से जब इस संपूर्ण प्रकरण पर  पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से ऐसा कोई प्रोटोकॉल नहीं था कि किसके हाथ में यह कलश सौंपनी थी. प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते प्रधानमंत्री नरेंद मोदी जी ने उनके हाथ में कलश सौंपी थी. बाकी अन्य जगह जिले के वरिष्ठ नेता व जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में यह अस्थ्लि कलश विसर्जित हो ही है.





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