बैंक घोटाले के खिलाफ बेगूसराय में आक्रोश मार्च

बिहार कथा, बेगूसराय। वाह रे देश के चौकीदार नीरव मोदी नाक के नीचे से देश का 11300 करोड़ रुपया लेकर हो गया फरार वाह रे देश के चौकीदार के गगनभेदी नारों से गूंज उठा बेगूसराय। फ्रेंड्स ऑफ आनंद के कार्यकर्ताओं ने आक्रोश मार्च निकालकर फूंका देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला। आयोजित सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष प्रदीप क्षत्रिय ने कहा कि इतने बड़े बैंकिंग घोटाले को जानकर देश स्तब्ध रह गया है। सरकार की नाक के नीचे इतना बड़ा PNB बैंकिंग घोटाला हुआ है। इसकी जिम्मेदारी तय की जाने की जरूरत है। बिना सरकार की मिलीभगत से इतने बड़े घोटाले का होना असंभव प्रतीत होता है। जब बैंकिंग सेक्टर में प्रत्येक 3 महीने पर ऑडिट होता है। तब फिर आखिर क्यों लगातार नीरव मोदी को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग बैंक के द्वारा किया गया यह उच्चस्तरीय जांच का विषय है। यह काम बैंक किसी छोटे-मोटे कर्मचारी का नहीं बल्कि चेयरमैन के स्तर का है और इसमें कई सफेदपोश नेताओं की मिलीभगत है। सब लोगों ने मिलकर देश के गरीबों का पैसा लूट कर विदेश भेजने की साजिश की है। इस घोटाले के सामने आने के बाद PNB के शेयर 11 पर्सेंट तक गिर गया है। जिससे निवेशकों का 3000 करोड़ रुपया डूबने के कगार पर हैं। आखिर उन रुपयों की देनदारी किसके ऊपर तय होगी। सारा देश आज यह सवाल मोदी सरकार से पूछ रहा है। हद तो तब हो गई जब इस भ्रष्टाचार मुक्त सरकार में घोटालेबाज नीरव मोदी दावोस में प्रधानमंत्री के मंच के पीछे खड़ा होता है। आखिर किसके दबाव में अभी तक सीबीआई के द्वारा लुक आउट नोटिस जारी नहीं किया गया है। गरीब लोगों से बैंक अपना ऋण वसूलने के लिए तरह-तरह के हथकंडों का इस्तेमाल करता है यहां तक कि गुंडों का सहारा लिया जाता है और नीलम मोदी और विजय माल्या जैसे लुटेरों को हजारों करोड़ दिए जाते हैं। यह गरीबों के साथ कैसा मजाक हो रहा है। उत्तर प्रदेश के ज्ञान दास नामक किसान को ट्रैक्टर का ₹90000 का ऋण नहीं चुका पाने के कारण बैंक के कर्मचारियों ने उसी ट्रैक्टर से कुचलकर मार दिया था। बैंक के वही अधिकारी सरकार के साथ मिलीभगत करके विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे लोगों को हजारों करोड़ रुपए लेकर देश से भागने की मोहलत दे रहे हैं। इसकी उच्च स्तरीय जांच की जरूरत है। हम लोग नैतिक आधार पर नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हैं। अगर बड़े-बड़े लुटेरे इसी तरह से कर्ज लेकर देश से भागते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा देश दिवालिया हो जाएगा और इसकी सारी जिम्मेदारी युवा विरोधी छात्र विरोधी मोदी सरकार के ऊपर होगी। जिसने राजनीतिक लाभ के लिए नौकरियों पर ताला लगाकर रखा हुआ है। नोटबंदी के दौरान बैंकों के द्वारा काले धन को सफेद करने का जो गंदा खेल हुआ है। हम लोग इसकी उच्चस्तरीय सीबीआई जांच की मांग करते हैं। नोटबंदी के नाम पर इस भ्रष्ट सरकार के द्वारा सिर्फ आम आदमी और गरीबों को ही परेशान किया गया। इस पूरी तरह से नाकाम विफल सरकार को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए






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