हवा में उड गए बिहार के मॉडल स्कूलों के उद्देश्य

जमुई : केंद्रीय विद्यालय की तर्ज पर केंद्र व राज्य सरकार के सामूहिक सहयोग से जिलेभर में खोला गया मॉडल स्कूल अपने उद्देश्य में असफल साबित होता दिख रहा है. आलम यह है कि विद्यालय खोले जाने के वर्षों बीत जाने के उपरांत भी उन विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य अब तक शुरू नहीं किया जा सका है. जिस वजह से लगने लगा है कि मॉडल स्कूल अब अपने उद्देश्य से भटकने लगा है. बताते चलें की बीते वर्ष 2007 के स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने भाषण में की गयी घोषणा के अनुपालन में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ.
मनमोहन सिंह ने मॉडल स्‍कूल योजना का प्रारंभ नवंबर, 2008 में किया था. मॉडल स्कूल खोले जाने का मुख्य उद्देश्य उत्कृष्टता के बैंचमार्क के रूप में ब्लॉक स्तर पर प्रति ब्लॉक एक स्कूल खोलकर प्रतिभावान ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराना था. जिसके तहत जिले के प्रत्येक ब्लॉक में अच्छे स्तर का कम-से-कम एक वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल की स्थापना कर प्रगति निर्धारण में अहम भूमिका निभाना था. मॉडल विद्यालयों में नवाचारी पाठ्यचर्या व नये तरीके से शिक्षण का प्रयोग कर बच्चों को परंपरागत शिक्षा से अलग शिक्षा प्रदान करने की योजना बनायी गयी थी.
कैसे होना था क्रियान्वयन
मॉडल विद्यालय की को योजना के दो रूप में कार्यान्वित किया जाना था. जिसमें राज्य सरकारों के माध्यम से शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉक (इबीबी) में मॉडल स्कूलों की स्थापना की जानी थी तथा जो ब्लॉक शैक्षिक रूप से पिछड़े नहीं हैं वैसे प्रखंडों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) पद्धति के तहत विद्यालयों की स्थापना की जानी थी.
राज्‍य क्षेत्र सरकारों के माध्‍यम से इबीबी में मॉडल स्कूलों की स्‍थापना के लिए राज्‍य क्षेत्र घटक 2009-10 से कार्यान्वित किया जा रहा है तथा उन ब्लॉकों, जो शैक्षिक रूप से पिछड़े नहीं हैं, में मॉडल स्कूलों की स्थापना के लिए पीपीपी घटक का कार्यान्वयन 2012-13 से शुरू किया गया है.
जिले के नौ प्रखंडों में बने हैं मॉडल स्कूल
बताते चलें कि वर्तमान में जिले के कुल 10 प्रखंडों में झाझा को छोड़कर नौ में मॉडल विद्यालय का निर्माण कराया गया है. जिसमें सदर प्रखंड के सतायन में, खैरा प्रखंड के दाबिल में, बरहट में, लक्ष्मीपुर के कल्ला जिनहरा में, सिकंदरा के लछुआड़ में, अलीगंज के ताजपुर में, गिद्धौर में, सोनो के पैलबाजन में व चकाई शामिल हैं.
कहीं संचालित होने से पहले ही खंडहर में न हो जाये तब्दील
मॉडल स्कूल के निर्माण में संवेदक द्वारा बरती गयी लापरवाही के कारण ही जिलेभर के ज्यादातर विद्यालय भवन अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होने लगे हैं. वहीं कई विद्यालयों में वर्तमान में कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा विद्यालय में लगे खिड़की व दरवाजों की चोरी भी कर ली गयी है व कई विद्यालय की छतों से अब सीमेंट टूटकर गिरने लगा है. अब प्रश्न यह उठने लगा है कि कहीं ऐसा नहीं हो कि यह विद्यालय कार्य में आने से पूर्व ही इतिहास का हिस्सा बन जाये.






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