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मुहर्रम में भांजते थे बाबा धाम की लाठी

अरुण कुमार आज मुहर्रम है! नहीं पता कि मुहर्रम की शुभकामनाएं दी जाती है या कुछ और? जब तक गांव में था तब तक पता ही नहीं चला कि मुहर्रम हिन्दुओं का त्योहार है या मुसलमानों का। मेरे गांव अहियापुर में हकीम मियां ताजिया बनाते थे जिसे हमलोग ‘दाहा’ कहते थे। मेरे गांव में सभी जातियों के अलग-अलग टोले हैं लेकिन हकीम मियां का परिवार हमारी जाति के ही टोले में बस गया था। ऐसा कैसे हो गया किसी को नहीं पता। ‘दाहा’ बनाने का काम हकीम मियां दस-पन्द्रह दिनRead More


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