Hindi

 
 

दुनिया में हर व्यक्ति के जन्म की भाषा केवल हिन्दी !

डा.श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट भले ही कुछ लोग अंग्रेजी को दुनिया का पासपोर्ट बताते हो और भारत में अंग्रेजी की खुलकर पैरवी करते हो। लेकिन सच यही है कि हिन्दी समेत सभी भारतीय भाषाओं को बोनी भाषा बताकर अंग्रेजी की पैरवी करना बेहद शर्मनाक है। यह कुछ लोगो की अंग्रेजियत भरी सोच हो सकती है जिसका भारतीयता से कोई नाता नही है। ऐसे लोग या तो हिन्दी अच्छी तरह से जानते नही या फिर उन पर अंग्रेजी इस कदर सवार है कि उन्हे अंग्रेजी के सिवाए कोई दुसरी भाशा दिखाई हीRead More


हिंदी महारानी है या नौकरानी ?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक आज हिंदी दिवस है। यह कौनसा दिवस है, हिंदी के महारानी बनने का या नौकरानी बनने का ? मैं तो समझता हूं कि आजादी के बाद हिंदी की हालत नौकरानी से भी बदतर हो गई है। आप हिंदी के सहारे सरकार में एक बाबू की नौकरी भी नहीं पा सकते और हिंदी जाने बिना आप देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी बन सकते हैं। इस पर ही मैं पूछता हूं कि हिंदी राजभाषा कैसे हो गई ? आपका राज-काज किस भाषा में चलता है ? अंग्रेजीRead More


हिंदी दिवस पर जानिये बिहार के सबसे बड़े हिंदी सेवी को

#हिंदीदिवस पुष्यमित्र क्या आप जानते हैं कि यह तसवीर किनकी है? अगर आप हिंदी प्रेमी हैं तो आपको जानना चाहिए. यह महराजकुमार रामदीन सिंह की तसवीर है, जिन्होंने उन्नीसवीं सदी के आखिर में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए पटना में खड़ग विलास प्रेस की स्थापना की थी. इस खगड़ विलास प्रेस का महत्व आप इसी बात से समझ सकते हैं कि आधुनिक हिंदी साहित्य के निर्माता कहे जाने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र की 80 फीसदी से अधिक किताबें इसी प्रेस से छपी थीं. उनके अलावा उस दौर के ज्यादातर हिंदी साहित्यकारRead More


‘हिंदी दिवस’ का कर्मकांड ?

ध्रुव गुप्त आज हिंदी दिवस है। हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रति अश्रु-विगलित भावुकता का दिन। हर सरकारी या गैर सरकारी मंच से हिंदी की प्रशस्तियां गाई जाएंगी, लेकिन जिन कमियों की वज़ह से हिंदी आजतक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना अपेक्षित गौरव हासिल नहीं कर पाई है, उनकी बात कोई नहीं करेगा। हिंदी कल भी भावनाओं की भाषा थी, आज भी भावनाओं की ही भाषा है ! आज के वैज्ञानिक और अर्थ-युग में किसी भी भाषा का सम्मान उसे बोलने वालों की संख्या और उसका साहित्य नहीं, विज्ञान कोRead More


हिन्दी को अब राष्ट्रभाषा होना ही है

प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी राष्ट्रभाषा को समझने से पहले राष्ट्र, देश और जाति शब्दों को समझना असमीचीन न होगा। वस्तुत: ‘राष्ट्र’ को अंग्रेज़ी शब्द ‘नेशन’(Nation) का हिन्दी पर्याय माना जाता है,किंतु इन दोनों शब्दों में कुछ अंतर है। अंग्रेज़ी में ‘नेशन‘ शब्द से अभिप्राय किसी विशेष भूमि-खंड में रहने वाले निवासियों से है जबकि ‘राष्ट्र’ शब्द विशेष भूमि-खंड, उसमें रहने वाले निवासी  और उनकी संस्कृति का बोध कराता है। राजनीतिक दृष्टि से और भौगोलिक रूप से एक विशेष भूमि-खंड को‘देश’ की संज्ञा दी जाती है, किंतु इसका संबंध मानव समाज से नहीं है। ‘जाति’ से अभिप्राय उस मानव समुदाय से है जो सामाजिक विकासRead More


अब अदालती फैसले हिंदी में

डॉ. वेदप्रताप वैदिक आजादी के 70 साल बाद भी हमारा देश अंग्रेजी का गुलाम है। किसी भी शक्तिशाली और संपन्न राष्ट्र के अदालतें विदेशी भाषा में काम नहीं करतीं लेकिन भारत की तरह जो पूर्व गुलाम देश हैं, उनके कानून भी विदेशी भाषाओं में बनते हैं और मुकदमों की बहस और फैसले भी विदेशी भाषा में होते हैं। जैसे बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, मोरिशस आदि ! भारत की अदालतें यदि अपना सारा काम-काज हिंदी में करें तो उन पर कोई संवैधानिक रोक नहीं है लेकिन जब भारत की संसद ही अपनेRead More


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