एक किलो चीनी पर खर्च होता है 2000 लीटर पानी

नई दिल्ली.आप माने या न माने लेकिन यह सच है कि एक किलो चीनी प्राप्त करने के लिए किसानों को 2000 लीटर पानी खर्च करना पड़ता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्रा के अनुसार गन्ने की भरपूर पैदावार लेने के लिए पानी की पर्याप्त आवश्यकता होती है और जितने गन्ने से एक किलो चीनी बनती है उसे तैयार करने के लिए किसानों को 2000 लीटर पानी की जरुरत होती है। वैज्ञानिक 2030 तक देश में चीनी की जरुरतों को पूरा करने तथा किसानों की आय बढाने के लिए जलवायु परिवर्तन , बढते तापमान , गन्ने में होने वाली बीमारियों , उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने तथा पानी की जरुरतों को कम से कम करने को लेकर अनेक अनुसंधान परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। डा महापात्रा के मुताबिक गन्ना में जल प्रबंधन पर शोध जारी है और बाढ प्रभावित एवं जल जमाव एवं सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी गन्ने की भरपूर पैदावार हो इस पर कार्य चल रहा है । वैज्ञानिक गन्ना की खेती में क्रांति लाना चाहते हैं और इसके लिए नयी किस्मों का विकास किया जा रहा है.  डा महापात्रा ने कहा कि देश चीनी उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है और वर्तमान में दो करोड़ 60 लाख टन चीनी का उत्पादन हो रहा है। वर्ष 2030 तक देश में तीन करोड़ 60 लाख टन चीनी की आवश्यकता होगी जिसके मद्देनजर गन्ने का उत्पादन बढ़ाने के लिये इसकी नयी किस्मों का विकास किया जा रहा है । वर्तमान में औसतन 70 टन प्रति हेक्टेयर गन्ना की पैदावार होती है जिसे बढाकर 100 टन प्रति हेक्टेयर करने का प्रयास किया जा रहा है । गन्ना की नयी किस्म 0238 की खेती से किसानों की आय में अच्छी वृद्धि हुयी है और बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जा रही है।  इसी प्रकार से गन्ना के शीरा से बड़े पैमाने पर एथनाल का उत्पादन कर उसे पेट्रोल में मिलाया जा सकता है । पेट्रोल में एथनाल मिलाने की सीमा 20 प्रतिशत तक की जा सकती है । गन्ने की उत्पादकता बढने और एथनाल बनाये जाने से न केवल किसानों की आय बढेगी बल्कि पेट्रोल आयात पर भी कम खर्च करना पड़ेगा। भारत से 28 देशों को गन्ने की खेती की प्रौद्योगिकी और बीज की आपूर्ति की जाती है । डा. महापात्रा के अनुसार भारतीय गन्ने के बीज ब्राजील , मैक्सिको , बंगलादेश और दक्षिण अफ्रिका में क्रांति ला रहे हैं । देश के कुछ राज्यों में कम से कम पानी में गन्ना की भरपूर फसल लेने के प्रयोग सफल रहें हैं । इसके लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली का सहारा लिया जा रहा है।  देश में लगभग 50 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती की जाती है । इसमें से 55 प्रतिशत हिस्सा उत्तर भारत में है है लेकिन गन्ने की कुल पैदावार में इस क्षेत्र का हिस्सा 48 प्रतिशत ही है।






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