वो आजादी गैंग की लाल सलाम, मै भगवाधारी जय श्री राम

नितेश पांडे,बनारस से. बिहार के नक्सल प्रभावित औरंगाबाद जिले से निकल कर सर्वविधा की राजधानी, काशी हिन्दू विश्वविधालय के विधि संकाय के छात्र रहे प्रभात बान्धूल्य ठेठ बनारसी और भोजपुरिया अन्दाज मे प्रेम की नई परिभाषा लेकर जल्द ही आ रहे है ,अपने पहले हिन्दी उपन्यास ” बनारस वाला इश्क़ ” के साथ।
उपन्यास की टैग लाइन है ” वो आजादी गैंग की लाल सलाम , मै भगवाधारी जय श्री राम ” इस एक वाक्य मे सम्पूर्ण उपन्यास की घटनाएँ समाहित है । जब देश मे राजनीति बटी हुई है , जाति और धर्म के नाम पर उस समय कोई वकील ही ऐसे बेमेल इश्क की कल्पना कर सकता है । लेफ्ट और भगवा नेता के बीच प्यार की गाडी कैसे बीएचयू से निकलकर बनारस की गलियो मे गुजरती है , छात्र राजनीति और पढाई के बीच का समन्वय सबकुछ है – ” बनारस वाला इश्क ” मे ।
आमतौर पर वकालत की पढाई करने वाले काफी सिरियस होते है, लेकिन समय बदला तो नई पिढी के युवा पढाई का आनन्द ले रहे है । सवाल ये है , कि लॉ का छात्र इश्क कब लिख बैठा , क्या ये उनकी अपनी कहानी है ?
प्रभात बताते है कि ” बनारस वाला इश्क़ ” किसी सच्ची घटना पर आधारित नही है , बल्कि हर उस बिहारी का है, जो जीवन मे अपने संघर्षो के बल पर देश-दूनिया मे अपना परचम लहराता है , ये हर उस बनारसी की कहानी है -जो अपने प्यार के सपने बनारस की गलियो और गंगा घाट का सिढियो पर सजाता है , बीएचयू मे पढे हर उस छात्र-छात्रा की कहानी है , जो विश्वविधालय के संस्कार, जातिवाद और लेफ्ट राइट राजनीति के चक्कर से बचने का प्रयास करते हुए अपनी पढाई पुरी करता है । पहली बार किसी भगवाधारी नेता और लेफ्ट की महिला विंग नेत्री के बीच किसी असम्भव से लगने वाले रिश्ते की कल्पना की गई है ।
” बनारस वाला इश्क ” छात्र जीवन के संघर्षो पर आधारित , समाजिक परिस्थितियो पर प्रहार करती दो प्रेमी जोडे की कहानी है ।
(बिहार कथा विशेष- बनारस से )






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