जिस समाज में स्त्री को माल बताया जाता हो, वहां रेप कानूनी समस्या नहीं!

file photo

file photo

नीतिश कुमार पांडे. गोपालगंज। 
बुलंदशहर काण्ड कोई अकेली घटना नहीं है। यह किसी गैंग की कारिस्तानी नहीं है। और इसे न तो कोई मुख्यमंत्री रोक सकता है , न कोई प्रधानमंत्री। यह आइसोलेशन में घटी घटना नहीं है। रिक्शावाला जब किसी महिला सवारी को बिठाता है तो देखिये उसकी आँखों में लालच का पानी। एक आॅटो ड्राइवर जब किसी युवती या बच्ची को बिठाता है तो देखिये उसकी नजर। वह आधा वक्त मिरर में ही देखता रहता है। बस कंडक्टर, ड्राइवर को देखिये, हवस होती है उनकी आँखों में। न न। जो रेप नहीं करता या नहीं किया, वह भी रेपिस्ट होता है। स्त्रियां समझती है। दूर मत जाइये, अपने पास के बाजार में सब्जी वाले लौंडो की बातें सुनिये, फल बेचने वाले लड़को की बाते सुनिये, उनके द्विअर्थी संवाद सुनिये , केला, बाबूगोशा, नासपाती, संतरा के कई कई मांयने बनाये होते हैं। वे रिपीटेडली रेप करते हैं, बातों से, नजरों से। स्त्रियां रोज झेलती हैं।
स्कूल की बच्चियों से पूछिये, कैसे देखता हैं उन्हें गार्ड, स्कूल बस का कंडक्टर, ड्राइवर, माली और उनका टीचर भी। स्कूल टीचर से पूछिये, कहाँ कहाँ कैसे कैसे बचती हैं वे। काम वाली बाइयों से पूछिये। बैंक में काम करने वाली स्मार्ट वुमेन से पूछिये, पुलिस में काम करने वाली एम्पावर्ड वुमेन से पूछिये, सब टारगेट हैं। और उन्हें कोई एलियन टारगेट नहीं कर रहा।
कल ही धनबाद आनंदविहार समर स्पेशल ट्रेन से धनबाद से लौट रहा था। ट्रेन थोड़ी खाली सी थी। एक अकेली लड़की भी लौट रही थी। पूरा ट्रेन उसे ऐसे घूर कर देख रहा था मानो चबा जायेंगे, पी जायँगे। चार चार डिब्बे दूर तक खबर पहुच चुकी थी कि एक लड़की अकेली है। फेलो-पैसेंजर की छोड़िये, पेंट्री वेंडर तक की नजरें स्कैन कर रही थी उसे। वह ऊपर वाली सीट में लगभग दुबकी ही रही। यह किसी रेप से कम नहीं होता।
अपने आसपास देखिये। रेल में देखिये। मेट्रो में देखिये। हवाईअड्डे पर देखिये। किसी अकेली लड़की को घूरती नजरों को देखिये। शरीफ लोग स्कैन कर लेते हैं उन्हें। ये सब एक तरह से रेप ही है। स्त्रियां रोज गुजरती हैं इस पीड़ा से।
देखिये कभी अपनी पुलिस को भी। स्त्रियों के प्रति उनका नजरिया कभी अनौपचारिक बातचीत में सुनिये। घर से निकलने वाली हर औरत उनके लिए खराब है, और घर के भीतर वाली औरतें चीज।

 (नीतिश कुमार पांडे गोपालगंज के हैं व बीएचयू के छात्र हैं)

(नीतिश कुमार पांडे गोपालगंज के हैं व बीएचयू के छात्र हैं)

यह समस्या कानून व्यवस्था की नहीं है। यह शिक्षा की भी नहीं है। यह समस्या सोसल कंडीशनिंग की है। जहाँ चारो ओर केवल यही सिखाया जाता है कि स्त्री केवल स्त्री है। माल है, उपभोग की चीज है। इसका न किसी पोलिटिकल पार्टी से सम्बन्ध है, न किसी राज्य से। सब जगह एक ही सोच है। स्त्री एक चीज है। रोज ही बुलंदशहर, रोज ही निर्भया काण्ड होता है हमारे बीच। यह कोई आॅगेर्नाइज्ड क्राइम नहीं है कि पुलिस पेट्रोलिंग, मुखबिर से, इंटेलिजेंस के सपोर्ट से रोक लेंगे आप।और हाँ , कभी लोकल संगीत को देख लीजिये, किसी भी भाषा में देख लीजिये, उत्तर से दक्खिन तक, पूरब से पश्चिम तक, कितना गन्दा है वह, कितना हिंसक है वह । साथ ही , कितनी सहजता से उपलब्ध है पोर्न। ये सब कॉकटेल बना रहे हैं। समाज को हिंसक बना रहे हैं और बलात्कारी पैदा कर रहे हैं। और हम सब शिकार होंगे, इंतजार में रहिये. (नीतिश कुमार पांडे गोपालगंज के हैं व बीएचयू के छात्र हैं)






Comments are Closed

Share
Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com