151 साल पहले बिहार से भगवान बुद्ध की मूर्ति ले गए थे अंग्रेज, अब उठेगी वापस लाने की मांग

bhagwan budh500 किलो की है मूर्ति, 1865 में ब्रिटिश सरकार ले गई थी लंदन
लक्ष्मीकान्त दुबे
भागलपुर। बिहार के ऐतिहासिक स्थल सुल्तानगंज में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान मिली बुद्ध की प्रतिमा ब्रिटिश संग्रहालय में शोभा बढ़ा रही है। लगभग 150 साल पहले इसे अंग्रेज ब्रिटेन लेकर चले गए थे। हैरानी की बात यह कि इस बारे में ज्यादा लोगों को पता नहीं है। लेकिन अब इसे ब्रिटेन से वापस लाने के लिए संसद में मांग उठाई जाएगी। मूर्ति का बजन 500 किलोग्राम से ज्यादा है। ज्ञात हो कि सुल्तानगंज हिन्दू तीर्थ के अलावा बौद्ध पुरावशेषों के लिए भी जाना जाता है।1861 में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान सुल्तानगंज में रेलवे स्टेशन के अतिथि कक्ष निर्माण के लिए खुदाई हो रही थी। उसी दौरान वहां तांबे की लगभग तीन मीटर ऊंची और एक मीटर चौड़ी बुद्ध की प्रतिमा मिली। इसका वजन लगभग 500 किलोग्राम है। 1865 में इस प्रतिमा को ब्रिटिश सरकार लंदन ले गई थी।
500 से 700 ई बताया जा रहा निर्माण काल
ब्रिटिश संग्रहालय में रखी तांबे की इस मूर्ति के बारे में पुरातत्वविदों का कहना है कि यह नालंदा शैली जैसी लगती है। उनके अनुसार, सुप्रसिद्ध इतिहासकार राखाल दास बनर्जी ने इसे पाटलिपुत्र शैली में निर्मित बताया था। इसका निर्माण काल 500 से 700 ई बताया जा रहा है।
प्रतिमा वापस लाने के लिए संसद में उठाएंगे आवाज : निशिकान्त
गोड्डा से भापजा सांसद निशिकान्त दुबे ने कहा कि सुल्तानगंज में खुदाई के दौरान 1861 में मिली बुद्ध प्रतिमा अंग प्रदेश की विरासत है। इस प्रतिमा को वापस लाने के लिए वह संसद में आवाज उठाएंगे। केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत अन्य संबंधित लोगों से भी व्यक्तिगत रूप से मिलकर प्रतिमा को वापस लाने की पहल करने की मांग करेंगे। from bhaskar.com






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