बिहार : 9 सीटों के लिए 22 या 23 मार्च को उम्मीदवार के नाम पर लगेगी मुहर

9 सीटों के लिए 22 या 23 मार्च को उम्मीदवार के नाम पर लगेगी मुहर
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वीरेंद्र यादव के साथ ‘40 सीटों का चालीसा’-2
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पहले चरण में 4 और दूसरे चरण में 5 सीटों के लिए मतदान होगा। इन 9 सीटों के लिए दोनों पक्षों के उम्मीदवारों की सीटों और उम्मीदवारों के नाम की घोषणा होली के बाद 22 या 23 मार्च को हो सकती है। प्रथम चरण के नामांकन की अंतिम तारीख 25 मार्च और दूसरे चरण में नामांकन की आखिरी तारीख 26 मार्च है। प्रथम चरण में 11 अप्रैल को औरंगाबाद, गया, नवादा और जमुई में मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर और बांका के लिए 18 अप्रैल को मतदान होगा। एनडीए और महागठबंधन के सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, इन 9 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा 22 या 23 मार्च होगी। संभव है कि सीट और पार्टी की घोषणा इससे पहले हो जाए। दरअसल पार्टी के हिसाब से सीट तय होने के बाद पार्टी के अंदर सीट तय करने में भी कुछ दिन लग जाएंगे। इसलिए नामांकन की अंतिम तारीख से दो या तीन दिन पहले ही उम्मीदवारों की घोषणा संभव है।
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उपचुनाव में अंडरस्टैंडिंग
नवादा और डिहरी विधान सभा के लिए हो रहे उपचुनाव के लिए जदयू और भाजपा में आपसी सहमति बन गयी है। नवादा की सीट जदयू के खाते में जाने की संभावना है, जबकि डिहरी भाजपा के कोटे में जाएगी। स्वाभाविक रूप से दोनों सीटों के लिए दोनों दलों की ओर से दावेदारी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि नवादा सीट राजवल्लभ यादव और डिहरी इलियास हुसैन की सदस्यता समाप्त होने के के कारण खाली हुई है। दोंनों सीटों पर राजद का कब्जा था।
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पहले फेज में औरंगाबाद में फंस रहा पेंच
पहले फेज की चार सीटों पर एनडीए का कब्जा है। नवादा, जमुई और गया में उम्मीदवार पहले से ही तय हैं। औरंगाबाद की सीट पर पेंच फंस रहा है। औरंगाबाद जदयू के खाते में जाएगा या भाजपा के खाते में, अभी तय नहीं है। औरंगाबाद का तार आरा और काराकाट से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही इसका संबंध राजपूत और कोईरी राजनीति से जुड़ा है। यदि औरंगाबाद भाजपा के खाते में जाती है और किसी राजपूत को टिकट मिलता है तो आरा के सांसद आरके सिंह के टिकट पर ग्रहण लग सकता है। फिलहाल औरंगाबाद में सुशील सिंह भाजपा के सांसद हैं। ऐसे स्थिति में दोनों अपनी-अपनी सीट बचाने में जुटे हैं। अंतिम निर्णय के लिए अभी दस दिन इंतजार करना होगा।
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जमुई में जोर लगा रहे हैं बंटी चौधरी

सिकंदरा से कांग्रेसी विधायक बंटी चौधरी जमुई से महागठबंधन की ओर से टिकट के दावेदार माने जा रहे हैं। महागठबंधन में अभी टिकट का बंटवारा मंथन के दौर में है। इस सीट से शरद यादव के समर्थक व विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी भी जोर लगा रहे हैं। लेकिन बंटी चौधरी की सक्रियता ज्यादा दिख रही है। बंटी चौधरी कहते हैं कि वे जमुई के लिए स्थानीय हैं। अब तक लगातार कई सांसद बाहर से आकर जीतते रहे हैं। चिराग पासवान भी बाहरी हैं।
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मांझी का मन भाया, गया को अपनाया

पूर्व मुख्यमंत्री और हम के नेता जीतनराम मांझी महागठबंधन की ओर से गया में उम्मीदवार होंगे। महागठबंधन की सीटिंग सीट छोड़ दें तो गया ही एकमात्र सीट है, जिस पर उम्मीदवार तय माने जा रहे हैं। श्री मांझी 2014 के लोकसभा चुनाव में गया में पराजित हो गये थे और तीसरे स्थान पर पहुंच गये थे। लेकिन राजद के साथ गठबंधन के बाद श्री मांझी को संजीवनी मिलने की संभावना है। इसी उम्मीद में गया से दावेदारी कर रहे हैं और गया में समय भी दे रहे हैं।
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एनडीए विधायकों का उत्साह ठंडा

जैसे-जैसे उम्मीदवारों के चयन का समय नजदीक आ रहे हैं, एनडीए के विधायकों का उत्साह ठंडा पड़ता जा रहा है। विधान सभा में एनडीए विधायकों की संख्या बहुमत से एकाध ही ज्यादा है। इस कारण एनडीए का कोई भी दल विधायकों को टिकट देने से परहेज कर रहा है। कुछेक विधायक टिकट के लिए जोर आजमाईश भी कर रहे थे, लेकिन नेतृत्व का मंशा भाप कर शांत हो गये हैं। हालांकि एक विधायक ने कहा कि इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गयी है, लेकिन विधायकों से टिकट के लिए पूछा भी नहीं जा रहा है।





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