देश का पहला किडनी डायलिसिस हुआ था हथुआ महाराज गोपेश्वर साही का

पुण्य तिथि पर विशेष 

सुनील कुमार मिश्र,बिहार कथा, हथुआ/गोपालगंज। देश का पहला किडनी डायलिसिस हथुआ स्टेट के पूर्व महाराजा बहादुर गोपेश्वर प्रसाद साही का हुआ था। महाराजा का निधन 30 वर्ष की अल्पायु में ही किडनी के संक्रमण से क्रिश्चिन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल, वेल्लौर में 16 फरवरी 1962 को हो गया था। शनिवार को महाराज की पुण्य तिथि पर राज कर्मियों ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। अपने पिता को याद करते हुए हथुआ स्टेट के वर्तमान महाराज बहादुर मृगेन्द्र प्रताप साही ने बताया कि वे मात्र 10 वर्ष के थे,जब उनके पिता का निधन हुआ था। उन्होंने बताया कि अमेरिका के डॉ नाकू मोटो ने वेल्लौर में दो डायलिसिस किया था। हालांकि उन्हें बचाया नहीं जा सका। यह देश के इतिहास में पहली बार होने वाला डायलिसिस था। तब देश के सर्वश्रेष्ठ डाक्टरों की टीम में पूर्व मुख्यमंत्री डा बीसी राय, डॉ नलिनी रंजन सेन गुप्ता, होमियोपैथ के डॉ एसके दास, डॉ पीसी कोसी सहित तत्कालीन राज्यपाल सरोजिनी नायडू, जम्मू व कश्मीर के महाराज डॉ कर्ण सिंह आदि के देख-रेख में महाराज का इलाज हुआ था। कोलकाता में उनके अंतिम संस्कार के बाद जब राज परिवार के सदस्य पटना लौटे, तो पटना जंक्शन पर सभी रेल कर्मियों ने काली पट‌्टी बांध कर अपना शोक प्रकट किया था। यहां बताते चले कि महाराज गोपेश्वर साही का जन्म सात फरवरी 1932 में हुआ था। उनकी शादी 6 जून 1950 को तत्कालीन गया के सांबे स्टेट की राजकुमारी दुर्गेश्वरी साही के साथ हुआ था। महाराज गोपेश्वर साही के पिता गुरूमहादेव आश्रम प्रसाद साही के सन्यास ले लेने के कारण शादी के सभी रस्मों में पिता की भूमिका दरभंगा महाधिराज कामेश्वर प्रसाद सिंह ने किया था। देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, जगजीवन राम, महाराज गोपेश्वर साही के नजदीकी मित्रों में से थे। महाराज से मिलने वर्ष 1953 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद हथुआ पैलेसे में पहुंचे थे। जहां राष्ट्रपति का बचपन गुजरा था। महाराज ने भूमि दान कर हथुआ के गोपेश्वर महाविद्यालय को स्थापित किया था। महाराज के निधन के बाद उनकी पत्नी राजमाता दुर्गेश्वर साही ने हथुआ स्टेट के संचालन कुशलता के साथ किया था। वर्तमान में महाराज गोपेश्वर साही के इकलौते पुत्र महाराज बहादुर मृगेन्द्र प्रताप साही, वहू महारानी पूनम साही, पौत्र युवराज कौस्तुभ मणि प्रताप साही, पौत्रवधू विदिशा साही व पौत्री आद्या चिन्मयी साही द्वारा हथुआ राज का संचालन होता है।






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