बिहार में महंगी क्यों पड़ती है कार!

बिहार में कार खरीदना पर देना पडता है ज्यादा टैक्स, इसलिए फायदा उठाते हैं दूसरे राज्य के डीलर
बनारस-रांची में बिकती हैं पर पटना में दौड़तीं ये कारें, जानिए कारण
पटना. बिहार के प्रीमियम सेगमेंट चारपहिया बाजार में पड़ोसी राज्य तेजी से सेंध लगा रहे हैं। दरअसल, बिहार में गाडिय़ों का रजिस्ट्रेशन शुल्क अधिक है, लिहाजा झारखंड और उत्तर प्रदेश से वाहन खरीदने पर मोटी बचत हो रही है। जानकारों का कहना है कि इन राज्यों की तुलना में बिहार में गाडिय़ां आठ फीसद महंगी मिल रही हैं। इसके कारण महंगी गाडिय़ों की करीब 15 फीसद बाजार हिस्सेदारी बिहार के हाथ से निकल जा रही है। बिहार के चारपहिया बाजार में प्रीमियम सेगमेंट अर्थात 10 लाख से ऊपर वाली गाडिय़ों की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसद है। औसत हर महीने सभी कंपनियां 350 गाडिय़ों की बिक्री बिहार में करती हैं। अगर बिहार में रजिस्ट्रेशन शुल्क पड़ोसी राज्यों की तरह होता तो यह आंकड़ा 400 से 425 तक होता।  महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के अधिकृत डीलर किरण ऑटोमोबाइल्स के प्रबंध निदेशक नितिन कुमार कहते है, अगर स्कॉर्पियो का टॉप मॉडल आप बिहार में खरीदते हैं तो 1.83 लाख रुपये रजिस्ट्रेशन चार्ज देना होता है। यही मॉडल अगर झारखंड के रांची से लेते हैं तो रजिटस्ट्रेशन चार्ज मात्र 61 हजार रुपये देना होता है। उत्तर प्रदेश में भी बिहार की तुलना में रजिस्ट्रेशन शुल्क कम है, इसलिए आरा, बक्सर, सासाराम, सिवान, गोपालगंज आदि जिलों के लोग बनारस जबकि पटना, गया, जहानाबाद जिलों के लोग रांची से महंगी गाडिय़ां ले रहे हैं। 
फेस्टिवल सीजन में भी कारोबार मंदा
इस साल फेस्टिवल सीजन में भी पिछले साल की तु़लना में प्रीमियम सेगमेंट में 15 से 20 फीसद की कमी दर्ज की गई। जाहिर है महंगी गाडिय़ों का बाजार बिहार में सिमट रहा है। इससे राज्य सरकार को भी नुकसान हो रहा है। आद्विविक फोर्ड के प्रबंध निदेशक यूएस ओझा ने कहा कि बिहार में पहले बेस प्राइस पर रोड टैक्स सात फीसद लगता था। एक अक्टूबर से एक्स शोरूम कीमत पर 12 फीसद टैक्स का प्रावधान कर दिया गया। इस बदलाव से गाडिय़ों की कीमतें बढ़ गई हैं। अब बिहार में अगर किसी गाड़ी की कीमत 40 लाख रुपये है तो झारखंड में यह साढ़े चार लाख रुपये और यूपी में तीन लाख रुपये सस्ती मिलेगी। पटना में जिस कार पर टैक्स एक लाख रुपया लगता है, वहीं रांची में -24,926 रुपये, बनारस में- 61,798 रुपये लगते हैं.’ {इनपुट साभार : जागरण डॉटकॉम से }





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