महावीर से अटल तक इस देश की एक ही कथा है

पुष्य मित्र
पावापुरी बिहार के नालंदा जिले में स्थित है. पावापुरी में एक बहुत खूबसूरत तालाब है और उस तालाब के बीचोबीच एक मंदिर है. यह जैनियों का बड़ा तीर्थ है.

महावीर ने यहीं पर अपने प्राण त्यागे थे और यहीं उनका दाह संस्कार हुआ था. कहते हैं, उनके दाह संस्कार के बाद उनके चिता भस्म के लिए पूरे देश से उनके मानने वालों की भीड़ पावापुरी पहुंच गयी. उन लोगों ने वहां की मिट्टी इस कदर खरोची की वह जगह एक तालाब बन गया. यह वही तालाब है.
बुद्ध जब निर्वाण को प्राप्त हुए और उनका अंतिम संस्कार हुआ तो उनके अस्थि अवशेष को लेकर भी झगड़ा शुरू हुआ. फिर उनके एक समझदार शिष्य ने उसे दस हिस्सों में बांट दिया और जो दस स्थानों पर स्तूप के नीचे रखा गया. मगर जब अशोक राजा बने तो उन्होंने तमाम अस्थि अवशेषों को फिर से 84 हजार हिस्सों में बांटा और पूरी दुनिया में उसे भेज कर स्तूपों का निर्माण कराया.
सती जब यज्ञ की अग्नि में कूद पड़ी तो शिव से रहा नहीं गया. वे उसके मृत शरीर को लेकर पूरे देश में घूमने लगे. ऐसे में उनके अंग टूट-टूट कर गिर रहे थे. मान्यता है कि सती के अंग जहां-जहां गिरे वहां वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई.

फिर नेहरू आये. उन्होंने अपनी वसीयत में लिखा कि मेरी अस्थियों को गंगा में बहा देना, खेतों में उड़ा देना, पूरे भारत में फैला देना, मैं चाहता हूं कि मैं इस देश की धरती का हिस्सा बन जाऊं. उनकी मौत के बाद उनकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए हवाई जहाज की सेवा ली गयी और उस राख को पूरे देश में बिखेरा गया.

अटल जी ने कुछ नहीं कहा. मगर उनकी अस्थियों के 145 कलश बने हैं. पूरे देश में भेजे जा रहे हैं. इन्हें देश की दर्जनों नदियों में बहाने की योजना है. खबर है कि मध्यप्रदेश के भाजपा नेता तो इन्हें हर बूथ तक ले जाना चाहते हैं. योगी जी हर जिले तक इन्हें पहुंचाना चाहते हैं.
महावीर से अटल तक इस देश की एक ही कथा है.

( पुष्य मित्र के फेसबुक टाइमल लाइन से साभार )






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