मधेपुरा : समाजवादियों की धरती या फिर मंडल की धरती

निखिल मंडल

मधेपुरा की धरती जिसे समाजवादीयों की धरती या फिर मंडल की धरती कहा जाता है वहां अक्सर लोग बी.पी.मंडल (बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल) और बी.एन.मंडल (भूपेंद्र नारायण मंडल) के नाम को लेकर कन्फ्यूज़ हो जाते है।
दरअसल ये दोनों फुफेरे और ममेरे भाई थे।
बी.पी.मंडल जी का पैतृक गाँव मुरहो है जबकि बी.एन.मंडल जी का रानीपट्टी। रासबिहारी मंडल जी जो बी.पी मंडल जी के पिता थे उनका ननिहाल रानीपट्टी था।
1952 के विधान सभा चुनाव में बी.पी मंडल जी और बी.एन.मंडल जी चुनाव लड़े और बी.पी मंडल जी की जीत हुई।1957 में फिर बी.एन.मंडल जी की जीत हुई। इन दोनों के बिच राजनीतिक लड़ाई के कारण मधेपुरा के चौक चौराहे पर आज भी मुरहो-रानीपट्टी की कहानियों की चर्चा होते रहती है।
आज ये दोनों महापुरुष हमारे बिच नहीं है पर उनके याद में मधेपुरा की गलियों में बहुत कुछ है।
जहाँ एक ओर बी.एन.मंडल जी की कॉलेज चौक पे मूर्ति,उनके नाम से बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय,बी.एन.मंडल स्टेडियम है वही बी.पी मंडल जी कि बस स्टैंड के पास मूर्ति,उनके नाम से बी.पी.मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज,बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम,बी.पी मंडल टाउन हॉल आपको इन दोनों महापुरुष की ख्याति को हम सभी को याद दिलाता रहता है।
एक और जहाँ बी.एन.मंडल जी विधायक,सांसद से लेकर सोशलिस्ट पार्टी के अग्रणी नेता हुए तो वही बी.पी.मंडल जी विधायक,सांसद,मंत्री,मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रिय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष (मंडल आयोग) के रूप में अपार ख्याति अर्जित की।
मधेपुरा के इन दोनों महान पुरुष को में सम्मान के साथ नमन करता हूँ।
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