गोपालगंज के जनक राम ने भभुआ में ब्राह्मणों को शर्मशार होने से बचाया!

बिहार कथा. गोपालगंज./ भभुआ.  लोकसभा उप चुनाव परिणाम से जहां बीजेपी की लुटिया डुबी वहीं, बिहार में भभुआ विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी ने अपनी जीत का परचम लहराया. लेकिन इस जीत के असली सूत्रधार रहे गोपालगंज के सांसद जनक राम. भभुआ विधानसभा क्षेत्र में 40 हजार वोटर चमार समाज से थे. जनक राम इसी समाज से हैं. लिहाजा, पार्टी ने इस कैडराइज वोट को अपनी ओर मिलाने के लिए मजबूत चेहरे की तलाश की तो पूरे बिहार में जनक राम ही भाजपा में ऐसा चेहरा निकलने जिन पर पार्टी भरोसा कर सकती थी. गोपालगंज में भाजपा के ढेरों कार्यकर्ता हैं तो आए दिन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जनक राम को अनाप शनाप बोलते हैं. उन पर सवाल खडा करते हैं. ये लोग उपरी जाति से आते हैं. वे जनक राम के नेतृत्व क्षमता को नहीं पहचाने हैं. जनता से किस तरह से जुडे हैं, नहीं जानते हैं. बसपा में रहते हुए जनक राम ने बिहार के हजारों पंचायतों में जनसपंर्क किया है. उनका यह व्यापक अनुभव रहा है. भभुआ में रिकीं रानी पांडे के साथ पूरी भाजपा की सांख दांव पर थी. यदि यहां भाजपा हार जाती तो भाजपा के साथ—साथ ब्राह्मण समाज भी शर्मशार हो जाता. भभुआ में राजग उम्मीदवार रिंकी पांडे की जीत का अंतर 15458 मत रहा. निश्चित रूप से यह मत उस बिरादरी के रहे जिसे जनक राम ने मेहनत कर भाजपा की ओर मोडा. परिणाम सामने आया. जनक राम ने ब्राह्मण समाज के साथ पूरी भाजपा को बिहार में शर्मशार होने से बचा लिया.
भाजपा के लिए अनुसूचित जाति कितने जरूरी थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दिन भभुआ में सीएम नीतीश कुमार ओर डिप्टी सीएम सुशील मोदी की सभा थी. पटना से क्षेत्रिय संगठन को बिहार के पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे ने फोन कर कहा कि सीएम और डिप्टी सीएम की उपस्थिति में जनक राम से अनुसूचित जाति के लोगों से भाजपा के पक्ष में वोट की अपील करवाई जाए. जनक राम ने जब मंच पर माइक थामा तक, तो पूरी पब्लिक में उत्साह भर दिया. उन्होंने कहा कि यह चुनाव बिहार में विकास के लिए यह यज्ञ है. इस यज्ञ में अनुसूचिज जाति के समाज के लोग अपना वोट भाजपा के पक्ष में डाल कर अपने हिस्से की आहुति डालें. यह सुन कर पूरी सभा तालियों की गडगडाहट से गूंज उठी. दलित समाज के परंपरागत वोट डायवर्ट होकर भाजपा की झोली में आया और रिंकी रानी पांडे ने जीत का परचम लहरा दिया.






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