जाग गए देव, लेकिन इस बार शादी के लिए नहीं है अधिक लग्न

पटना.लंबी अवधि तक शयन के बाद भगवान विष्णु अब जग गए हैं। मंगलवार को हरिप्रबेाधनी एकादशी पर तुलसी विवाह के साथ ही म् माह से शहनाई पर लगी ब्रेक हट गई है। अब शादी का सीजन आ गया है। इस बार लग्न तो अधिक है लेकिन विशेष तिथि वाले कम हैं। दो माह में क्ब् तिथियों पर लग्न है। इसमें कुछ तिथियों पर तो विशेष संयोग बन रहे हैं जिस पर एक ही दिन में कई शांदियां है। मार्तण्ड ज्योतिष केंद्र के संस्थापक ज्योतिष विद्वान श्रीपति त्रिपाठी के मुताबिक कार्तिक माह में हरि को जगाने की परम्परा है। म् माह तक वह क्षीरसागर में शयन करते हैं। उन्हें हरिप्रबोधिनी एकादशी पर जगाने की परम्परा सदियों से चली आ रही है। इसके लिए कार्तिक मास में महीने भर से दीपदान, पूजन- अर्चन और अनुष्ठान चल किया जाता है। परम्परा के अनुसार मंगलवार फ्क् अक्तूबर को भगवान विष्णु का तुलसी से विवाह कराया गया।
ज्योतिष विद्वानों का मत है कि वैवाहिक मुहूर्त 7 नवंबर से शुरू हो रहे हैं। इस मुहूर्त देरी से शुरू होने का बड़ा कारण गुरु और शुक्र ग्रहों का अस्त रहना है। ये दोनों ग्रह विवाह के कारक ग्रह हैं। जब तक ये अस्त रहते हैं कोई भी मांगलिक कार्य नहीं हो पाता है। सूर्य के क्7 नवंबर को वृश्चिक राशि में प्रवेश करने के बाद वैवाहिक मुहूर्त आ जाएगा जो क्0 दिसंबर तक चलेगा।
इस वर्ष तीन जुलाई को विवाह का आखिरी मुहूर्त था। अब 7 नवंबर से लग्न शुरू होगा। इसके बाद वर्ष ख्0क्8 में मकर संक्रांति के बाद विवाह मुहूर्त प्रारंभ होंगे, जो मार्च में होलाष्टक प्रारंभ होने तक रहेंगे। ख्फ् नवंबर को विवाह पंचमी है। यह तिथि विवाह के लिए काफी शुभ मानी जाती है। इसी तरह ख्भ् नवंबर को त्रिपुष्कर योग रहेगा जबकि ख्8 और फ्0 नवंबर के मुहूर्त भी विशेष शुभ रहेंगे। दोनों दिन सूर्यास्त से शुरू होकर रात तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इन दोनों तिथियों के बीच ख्9 नवंबर को मोक्षदा एकादशी व गीता जयंती और तीन दिसंबर को पूर्णिमा व क्0 दिसंबर को रुक्मणी अष्टमी का दिन भी विवाह के लिए मंगलकारी योग में शामिल है।
ज्योतिष श्रीपति त्रिपाठी ने बताया कि मंगलवार को हरिप्रबोधनी एकादशी से भगवान विष्णु जाग गए हैं। सूर्य और शुक्र के अस्त होने से वैवाहिक मुहूर्त देरी से शुरू हो रहे हैं। इस लग्न में शादी के मुहूर्त तो कम हैं लेकिन कई तिथियों पर विवाह के विशेष संयोग भी बन रहे है। इसमें सर्वार्थ सिद्धि योग भी शामिल है।






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