पैर काट और आंख में सिंदूर डाल कर उल्लू की बलि देते हैं अंधविश्वासी, लेकिन खुश नहीं होती है लक्ष्मी

पैर काट और आंख में सिंदूर डाल कर उल्लू की बलि देते हैं अंधविश्वासी, लेकिन खुश नहीं होती है लक्ष्मी 
बिहार कथा. गोपालगंज. दीपावली की रात तांत्रिक अनुष्ठान और काला जादू करने वालों के लिए खास होती है.इस दिन कई अंधविश्वासी उल्लू की बलि देते हैं. उनका मानना है कि उल्लू की बलि देने से धन की देवी लक्ष्मी प्रसन्न होंगी. लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं है. उल्टे ऐसा करने से लक्ष्मी नाराज हो जाती है. किसी भी जीव के साथ क्रूरता करने से कोई भी देव खुश नहीं होता है. बताया जा रहा है कि इस तरह के अनुष्‍ठानों का असर उल्‍लू पक्षी की संख्‍या पर पड़ रहा है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार इस बात का तो आमतौर पर आंकलन भी नहीं किया जा सकता कि कितने सारे उल्‍लुओं की इस दिन बलि दे दी जाती है। लेकिन अब तो नौबत यहां तक आ गई है कि जंगम में इनका अस्‍तित्‍व भी खतरे में पड़ चुका है। ये आलम तब है जब वन्‍यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत भारतीय उल्‍लू प्रजातियों के बिक्री और शिकार तक पर बैन लगा हुआ है। अंधविश्वासी बलि देने से पहले उल्लू का पांव काट देते हैं, इसके बाद उसके आंख में सिंदूर डालते हैं जिससे कि उसकी आंख और लाल हो जाए. इस ताक्रिया क्रिया से उल्लू को बहुत तडपना पडता है. दूसरे जीवन के तडप से शौतान खुश हो सकता है. लेकिन कोई देवी देवता खुश नहीं होगा. अंधविश्‍वास के तहत ये भी माना जाता है कि उल्‍लू के साथ-साथ उसके पंजे, खोपड़ी, हड्डियां, पंख और मांस का तावीज भी बनाया जाता है। इसके अलावा इनका इस्‍तेमाल बेहद महंगी दवाओं में भी किया जाता है। वहीं एक तांत्रिक की मानें तो उनका कहना है कि लोग इसको बात को बहुत मानते हैं। वो मानते हैं कि दीपावली की रात उल्‍लू की बलि देना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मां लक्ष्‍मी प्रसन्‍न होती हैं।





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