किसके लिए मोदी ने करवाा था तेल का भंडारण

संजय तिवारी
जब मोदी ने लॉकडाउन किया तो क्रूड ऑयल की कीमतें गिर रही थीं। कमोबेश पूरी दुनिया में गाड़ियों के पहिये थम गये थे जिसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा।
तत्काल मोदी के खून में जो व्यापार है वो जाग गया। पेट्रोलियम मंत्रालय को आदेश हुआ कि जितना हो सकता है क्रूड ऑयल खरीदकर उसका भंडारण कर लो। इसमें कोई बुराई नहीं थी। आपदा में अवसर खोज लिया गया था। लेकिन ये सब किया किसके लिए गया? जनता के सुख सुविधा के लिए?
जी नहीं। ये सब राष्ट्र के लिए किया गया। सरकार की सुख सुविधा का बंदोबस्त किया गया। सस्ते में क्रूड खरीदकर उसका लाभ जनता को नहीं दिया गया। मई में जब सड़कों पर वाहन लौटे तो मोदी ने डीजल पेट्रोल पर लगनेवाली एक्साइड ड्यूटी बढाकर क्रमश: 32 और 33 रूपये कर दिया। यानी एक मोटरसाइकिल में जब आप एक लीटर पेट्रोल भरवाते हैं तब अकेले मोदी 33 रूपये टैक्स ले लेते हैं। 85 रूपये के उत्पाद पर 33 रूपये टैक्स का गणित मोदी है तभी मुमकिन है वरना आमतौर पर केन्द्र की सरकारें 10 से 15 रूपये के बीच ही एक्साइड ड्यूटी लेती रही हैं ताकि जनता पर ज्यादा बोझ न पड़े।
लेकिन मोदी तो राष्ट्र के विकास में लगा है। जनता तो सिर्फ राष्ट्र पर बलिदान होने के लिए पैदा हुई है तो क्या डीजल पेट्रोल पर तीन गुना टैक्स भी नहीं दे सकती? एक तरफ लोग लॉकडाउन की पीड़ा से बाहर निकलने का प्रयास कर रहे हैं तब उनके ऊपर मंहगाई की मार सबसे बड़ा प्रहार कर रही है। और जानते हैं मंहगाई बढाने की नीति पर लगातार काम कौन कर रहा है? वही आपके मोदी जी। डीजल पेट्रोल की कीमतों में आग लगाने का मतलब सीधे सीधे खेती और परिवहन की लागत में बढोत्तरी। इसका सीधा असर माल की कीमतों पर पड़ा है और एक का सामान डेढ में हो गया। जहां दस रूपये में चले जाते थे वहां बीस रूपये चुकाने पड़ रहे हैं।
मोदी है तभी ये मंहगाई मुमकिन है। कोई और होता तो जनता के प्रति इतनी क्रूर नीति कभी न अपनाता। कभी नहीं।






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