भारतीय इतिहास का काला दिन 05-11-1556

भारतीय इतिहास का काला दिन ( 05-11-1556)
वह आज ही की दिन था. बिहार के किसी फेरी वाले बनिये (वक्काल) का विश्वगुरु भारतवर्ष का सार्वभौम सम्राट के रूप में राज्याभिषेक होना वैश्विक इतिहास में अद्वितीय घटना है. विशेषकर सनातनधर्म की आधारभूत सांस्कृतिक धरोहर महाभारत कालीन इन्द्रप्रस्थ (दिल्ली) स्थित उस पुराने किले में जिसकी अवशेषों में सर्वकालीन सर्वदेशीय मनुष्य जाति के महानायक श्रीकृष्ण की मुरलीयों की धुन ‘शेष’ है ….. मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम और श्रीकृष्ण के पश्चात भारतीय जनता ने जिस शासक को अपने ह्रदय सिंहासन पर आरूढ़ किया, वह विक्रमादित्य है.
पानीपत के निर्णायक युद्ध ( द्वितीय) में स्वराज रक्षार्थ युद्ध कर रहे इस अजेय और विस्मयकारी योद्धा के साथ विश्वास घात कर युद्ध का रुख ऐन मौके पर पलट दिया गया था. अस्तु इतिहास के इस अप्रतिम अध्याय का अंत हो गया. उसके विक्रम का आदित्य अस्त हुआ और ऐसा अस्त हुआ कि फिर कहीं को भी न उगा.
वेदों और पुराणों के ही विपरीत स्थापित इस देश की जाति-व्यवस्था और खोखली धर्म निरपेक्षता ने अविश्वसनीय और आश्चर्यजनक रूप से सदियों से भारतीयों से ही एक भारी कीमत बलपूर्वक वसूल की है और हेमू उसका चमकीला उदाहरण है …..
षड्यंत्र का शिकार घायल परन्तु जीवित सम्राट हेमू को तथाकथित सहिष्णु अकबर अपने कैम्प में स्वयं अपने हाथों से दो दुकड़ों में इसलिए काट दिया था. क्योंकि वह उसका प्रतिद्वंदी व एक पराजित योद्धा नहीं अपितु काफिरों के ह्रदय का सम्राट था … तत्पश्चात उसके सिर को काबुल स्थित मीनार पर रखने तथा धड़ को उस पुराने किले के ही मुख्य द्वार पर लटकाने का हुक्म देकर काबुल से दिल्ली तक अपने मुग़ल साम्राज्य की पुनस्र्थापना पर अट्टहास किया था,जहाँ महज कुछ दिन पहले ही हेमू ने 364 वर्षों पश्चात स्वराज की पुनस्र्थापना का शंखनाद किया था.
भारतीय संस्कृति के पौरुष-पराक्रम का ललाट बिम्ब , अतीत का मेरुदंड, भविष्य का कल्पवृक्ष, भारतवर्ष की एकता का ऐतिहासिक स्मृति, सामाजिक एकता एवं सांस्कृतिक ऐश्वर्य का सम्मिश्रण, राष्ट्र के विक्रम का साक्षी, राष्ट्रिय आकांक्षाओं का प्रतीक, राष्ट्र के विक्रम का साक्षी, राष्ट्रीय आकांक्षाओं का प्रतिनिधि भारतीय इतिहास का अमिट हस्ताक्षर,विक्रमादित्य की गौरवमयी लघु श्रृंखला की अंतिम कड़ी ‘सार्वभौम सम्राट हेमचन्द्र (हेमू)’ किन्तु राष्ट्र की वेदी पर विसर्जित आज ही के दिन उस हुतामा के श्री चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम.
सुबोध गुप्ता
शोधकर्ता : आखिर कौन था हेमू ?
9810038445
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