बुधनमा, पत्रकार कोई दूसरे ग्रह से आया एलियन नहीं है

नवल किशोर कुमार

ए नवल भाई, आप तो डेली कुछ न कुछ लिखते ही रहते हैं। इ बताइए कि आज जो इंडियन एक्सप्रेस खबर छापिस है उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ पर ट्वीट करने वाले प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी के मामले को लेकर, उसको आप कैसे देखते हैं?

यार बुधनमा, यह मैंने देखा ही नहीं। क्या लिखा है इंडियन एक्सप्रेस ने?

क्या नवल भाई? इतवार को जाने आपको क्या हो जाता है। खाली मोबाइल के पीछे पड़ल रहते हैं। देखिए इ इंडियन एक्सप्रेस लिखा है कि “यूपी पुलिस अरेस्ट दिल्ली मैन फॉर ‘ऑब्जेक्शनेबुल’ ट्वीट ऑन योगी”।

हां तो क्या हुआ। खबर तो ठीके है।

आप भी गजबे हैं नवल भाई। खबरवा तो पढ़िए। इसमें तो प्रशांत कनौजिया को पत्रकार मानले नहीं गया है। उसको कथित तौर पर फ्रीलांस जर्नलिस्ट कहा गया है। जे है से कि इ सब नया शब्द कहां से आया। जर्नलिस्ट मतलब जर्नलिस्ट। फिर स्वतंत्र क्या और गुलाम क्या। क्या पत्रकार भी गुलाम होते हैं।

यार बुधनमा। आज कहां से ज्ञान की जड़ी-बूटी चिबा लिए हो। का समझते हो कि पत्रकार कोई दूसरे ग्रह का एलियन है जो जाति, लिंग, धर्म, भाषा के आधार पर अलगावल नहीं जाएगा। अरे जो पत्रकार किसी मीडिया कंपनी का कर्मचारी होता है, उसका रूतबा अलग होता है। दड़माहा (वेतन) और अन्य सुविधाएं पहले से तय होती हैं। साथ ही जिम्मेवारी भी। लेकिन उ जो फ्रीलांस होता है, वह समझता तो खुद को शेर है लेकिन उसकी भी अपनी कहानी है। एक-एक पैसे का मोहताज होता है। लेकिन होता तो पत्रकारे है।

मतलब इ हुआ नवल भाई कि सचमुच का पत्रकार तो वही हुआ जिसको कर्मचारी का दर्जा मिला हुआ हो। बाकी जाए गंगा जी के अंडा में।

हां। देश में जो श्रम कानून है, वह भी फ्रीलांस जर्नलिस्ट के अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकता है। दरअसल, उसके लिए कोई कानून है ही नहीं। आऊर तुम तो खाली एतने समझ रहे हो। आज बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों में पत्रकारों को संविदा के आधार पर रखा जाता है। यानी वे कर्मचारी नहीं होते हैं मजदूर होते हैं। एकदम दिहाड़ी मजदूर के जैसे। पत्रकारिता के दौरान यदि कोई ठोक दिहिस चाहे सरकार के कबाब में हड्डी बन गया तो संस्थान एक झटके में हाथ उठा लेता है।

अच्छा। तो इ बात है। ओही हम कह रहे थे कि प्रशांत कनौजिया को पत्रकार लिखे में इंडियन एक्सप्रेस को कौन परेशानी हुई। इतना तो लिख ही सकता था कि वह पत्रकार है।

यार बुधनमा, आज इतवारो के दिन तुम मेरे पीछे पड़े हो। जाओ भौजाई और बच्चों के साथ कहीं घूम-फिर आओ। अच्छा लगेगा। मेरे साथ रहोगे तो खाली एही सब मिलेगा। मोदी तराजू पर कैसे बैठ गया। सोनिया गांधी के घर में कौन सी खिचड़ी पक रही है। लालू यादव के बेटा कौन गुल खिलावे के फेरा में है। जाओ घूम आओ आऊर हमको भी बताओ कि देश-दुनिया में इन सबके अलावा भी कुछ हो रहा है कि नहीं।

ए नवल भाई, हम सब समझते हैं। एतवार के दिन आपको तो मूड बनाने का बहाना चाहिए। उ सब खेला सांझ के करिएगा। अभी तो….






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