हस्तकरघा उद्योग से पर्यावरण दूषित नही होता :- प्रो. तौहीद अंसारी
*एनाएतुल्लाह “नन्हे”*
*बिहार कथा | सीवान*
हस्तकरघा उद्योग से पर्यावरण दूषित नही होता है यह किसी भी प्रकार से जल, वायु, भूमि और ध्वनि प्रदूषण को प्रभावित नही करता है | इसलिए पर्यावरण संरक्षण हेतु हस्तकरघा से जुड़े और लाभ उठायें | उपरोक्त बातें सीवान क्षेत्रीय हस्तकरघा बुनकर संघ लिमिटेड के अध्यक्ष एवं सीवान सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के निदेशक प्रोफेसर तौहीद अंसारी ने कही | उन्होंने बिहार कथा के साथ एक विशेष शाकक्षत्कार में कहा कि केंद्र सरकार से लेकर बिहार सरकार तक हस्तकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कृत संकल्प है | सरकार बुनकरों के लिए बहुत सारी योजना लायी है जिस पर भारी अनुदान भी है उससे लाभ उठाने की जरूरत है | उन्होंने बताया कि 56 इंच लूम के लिए नीतीश सरकार 90% अनुदान दे रही है | मात्र 10% ही अपना पूंजी लगाकर बुनकर हस्तकरघा से खूब अच्छा तरह से अपना जीवन यापन कर सकते हैं | उन्होंने बताया कि लूम से तैयार माल को बेचने के लिए परेशानी की भी जरूरत नही है सरकार खुद खरीद रही है | सरकारी अस्पतालों में हस्तकरघा द्वारा तैयार सतरंगी चादर जो अलग-अलग सात रंगों का होता है सरकार उसको प्रयोग में लाकर बुनकर द्वारा हस्तकरघा लूम के जरिये तैयार चादर को इस्तेमाल कर रही है उनको आत्म निर्भर बना रही है | उन्होंने कहा कि गाँधी जी इतने दूरदर्शी थे कि आज़ादी के समय से ही पर्यावरण संरक्षण हेतु हस्तकरघा के चरखा को बढ़ावा दिया और आज पीएम मोदी भी हस्तकरघा के प्रति काफी गम्भीर हैं | प्रोफेसर अंसारी ने कहा हस्तकरघा द्वारा खादी को बढ़ावा देने कि जरूरत है तभी राष्ट्रपिता बापू के प्रति सच्ची श्रधांजलि होगी | उन्होंने कहा कि खादी पहनने से देशभक्ति की भावना जागती है | इसलिए राष्ट्र हित मे लोग खादी को प्राथमिकता दें जिससे हस्तकरघा उद्योग फल फूल और पर्यावरण भी संतुलित रहे |
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