हथुवा के एक ऐतिहासिक पोखरा कि अंतिम सांस
शशि भूषण भारती, बिहार कथा, हथुआ, गोपालगंज। ऐतिहासिक हथुआ के पश्चिम मठिया का पोखरा सुख गया और आज के जनप्रतिनिधि विकास का ढिढोरा पीटते है।
इसमे समाज का भी कम योगदान नही रहा है इस पोखरे को सुखने मे। खेती के लिए पंपसैट का पाइप डालकर इसको सुखने का एक कारण है। आने वाले समय मे ये पोखरे जिस रफ्तार से सुख रहे है त्राहिमाम का संदेश है।यह पोखरा प्राचीन हथुआ गोपालमंदिर के पोखरे से सुरंग माध्यम से जुडा हुआ था. जिसके कारण मानसून या बरसात में दोनों पोखरे में पानी ज्यादा होने पर संतुलन बना रहता था. तालाब के लबालब रहने के कारण आसपास के गांवों में ग्राउंडवाटर लेबल बना रहता था. लेकिन उचित रखरखाव व मेंटेनेंस नहीं होने के कारण इस पोखरे से गोपालमंदिर तक जुडे सुरंग टूट गया और बंद हो गया. आखिर इसका परिणाम अब सामने आया है. प्रकृतिक सांसाधन को नहीं सहेजने का जो दुष्परिणाम होता है, इसका यह बेहतर उदाहरण है.
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