जिंदा दफन होने से बच गया बुखार से बेहोश हुआ यह बालक, कैसे बची जान…

दरभंगा : एक कहावत है, ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय…!’ यह कहावत मंगलवार को बिहार के दरभंगा जिला स्थित सिमारी में चरितार्थ हो गयी. दरअसल, पहले से बीमार चल रहे एक बालक के बेहोश होने की स्थिति में उसके शरीर में हरकत न होने के बाद परिजनों ने उसे मृत समझ लिया. इसके बाद उसके अंतिम संस्कार की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गयी, लेकिन ऐन वक्त पर जब उसे नहलाया गया, तो उसके शरीर में हलचल हुई. फिर क्या था, लोगों ने उसे कुदरत का करिश्मा समझकर दोबारा अस्पताल ले गये, जहां डॉक्टरों ने उसे जीवित घोषित कर इलाज करना शुरू कर दिया. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बिहार के दरभंगा जिले के सिमरी के मुसहरी टोली निवासी दुखी सदा का सात साल का बेटा सुधीर सदा कई दिनों से बुखार की चपेट में था. उसका इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा था. शरीर में तेज बुखार की वजह से सुधीर बेहोश हो गया. काफी देर तक उसके शरीर में किसी प्रकार की हलचल न देखकर परिजनों ने उसे मृत समझ लिया. आनन-फानन में परिजनों ने उसके अंतिम संस्कार की तैयारी भी कर ली. स्थानीय निवासियों का कहना है कि उसे अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित स्थान पर ले जाने से पहले परिजनों ने सुधीर को स्नान कराया. स्नान कराने के बाद उसे लघुशंका हो गयी और उसके शरीर में हलचल शुरू हो गयी. सुधीर के शरीर में हुई हलचल के बाद परिजनों की आंखें खुलीं और जिस परिवार में मौत का कोहराम मचा था, वहां जीवन की आस जाग गयी. आनन-फानन में उसे लोग अर्थी से उठाकर अस्पताल ले गये, जहां डॉक्टरों ने उसे जीवित घोषित कर फिर से इलाज करना शुरू कर दिया. souce with thanks from Prabhat Khabar
« सारण स्नातक निर्वाचन : सर्वश्रेण के चयन के लिए होती है मतगणना (Previous News)
Related News
हथुआ में होगा 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ
17 से 20 मार्च तक हथुआ पंचायत के दुर्गामंदिर परिसर में होगा भव्य आयोजन महायज्ञRead More
गरीबी की गहराई से निकलने की आसान सीढ़ी है शिक्षा : सुनीता साह
‘गरीबी की गहराई से निकलने की आसान सीढ़ी है शिक्षा’ हथुआ ब्लॉक में जनसुराज काRead More

Comments are Closed