#महेंद्र सिंह धोनी

 
 

बुधनमा, क्रिकेट ग्राउंड पर बल्ला नहीं, बंदूक चलाओ

– नवल किशोर कुमार खेल खेल होता है और खेल में खेला जाता है न कि कुछ और। है कि नहीं? लेकिन इ बात बुधनमा को कहां बुझाता है। कबड्डी में हारता है तो माय-बहिन करे लगता है और शतरंज में एक बार हारने के बाद तो बुधनमा को तब तक चैन नहीं मिलता है जबतक कि वह दूसरे को हरा न दे। मत पूछिए कि बुधनमा खेल को लेकर कितना पैसनेट रहता है। एक बार बुधनमा लुडो खेल रहा था। मेहरारू के जोरे। खेल तो खेला ही होता है।Read More


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