अगले साल से हर मोबाइल में जीपीएस जरूरी

कम से कम 30 प्रतिशत दाम
नई दिल्ली. ए. देश के टेलिकॉम विभाग ने सभी मोबाइल फोन में जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) लगाना जनवरी 2018 से अनिवार्य कर दिया है, जिससे फोन को ट्रैक करने में मदद मिले. डीओटी ने हैंडसेट बनाने वाली कंपनियों की उस दलील को खारिज कर दिया कि फीचर फोन में इस सुविधा को जोड़ने से इसकी कीमत में कम से कम 30 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी. हैंडसेट मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को लिखी गई चिट्ठी में सरकार ने दलील दी है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे अहम है. साथ ही, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि इस मामले में इंडस्ट्री की किसी भी मांग पर अब विचार नहीं किया जाएगा. दूरसंचार विभाग ने इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन को 4 जुलाई को लिखी चिट्ठी में कहा था, आपातकाल की हालत में फोन उपयोगकर्ता का पता लगाने के लिए जीपीएस मुख्य टूल है, लिहाजा सरकार ने 1 जनवरी 2018 से सभी मोबाइल हैंडसेट में इस नियम का लागू करने का फैसला किया है. इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन ज्यादातर हैंडसेट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की नुमाइंदगी करता है.
दूरसंचार विभाग ने लिखा है कि एक बार फिर से यह कहा जाता है कि मोबाइल हैंडेसेट कंपनियां 1 जनवरी 2018 से भारत में बेचे जाने वाले सभी फोन में जीपीएस को लागू करने को लेकर 22 अप्रैल 2016 को जारी नोटिफिकेशन के दूसरे हिस्से का पालन करेंगी. भविष्य में इससे जुड़ी मांगों पर विचार नहीं किया जाएगा. सरकार ने 1 जनवरी 2017 और 1 जनवरी 2018 से सभी फोन में क्रमश: पैनिक बटन और जीपीएस लोकेशन की सुविधा मुहैया कराने को कहा था. इसका मकसद मुश्किल हालात में महिलाओं और अन्य लोगों को सुरक्षा मुहैया कराना है. इस साल मार्च से सभी हैंडसेट कंपनियों ने पैनिक बटन वाले नियम का पालन किया है.






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