आपकी सेहत खराब कर रहा है सस्ता इंटरनेट

आंखों की समस्या लेकर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी
एजेंसियां. नई दिल्ली.
सस्ता इंटरनेट डेटा भले ही अच्छा लगता हो लेकिन यह सेहत के लिए खराब है. सस्ते डेटा के कारण लोग फोन पर चिपके रहने के आदी हो जाते हैं, जिससे आंखों की रोशनी पर असर पड़ने के अलावा गला दर्द, माइग्रेन और कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. अगर आप सस्ते इंटरनेट डेटा इस्तेमाल करने पर खूब जोर दे रहे हैं तो सावधान हो जाइये. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ ऐंड न्यूरोसाइंस (नीमहंस) ने पिछले साल सेफ्टी ऐंड हेल्थी यूज ऑफ टेक्नॉलजी क्लिनिक में लोगों में स्मार्टफोन से चिपके रहने की लत पर एक सर्वे शुरू किया. शोध की शुरुआत मंे हर हफ्ते एक या दो मरीज ही आते थे, लेकिन बाद में यह संख्या बढ़कर हर हफ्ते 3 से 5 हो गई. अब शोध टीम इस समस्या के पैमाने को समझने के लिए एक नया सर्वे शुरू करने की योजना बना रही है.
कई समस्याएं पैदा हो रहीं
इस वजह से कई तरह की समस्याओं जैसे मूड खराब होना, बोरियत और अकेलेपन की भावना का पैदा होना है. फोन पर लगातार वीडियो देखने और गेम्स खेलने से आंखों पर भी असर पड़ता है. कई लोग आंखों के सूखेपन से पीड़ित हो रहे हैं, जिसकी वजह से बच्चों में निकट दृष्टि दोष हो सकता है यानी उनकी आंखों में दूर की चीजों को स्पष्ट नहीं देख पाने का दोष पैदा हो सकता है. दिल्ली के एक नेत्र चिकित्सक ने बताया कि, मेरे पास करीब 27-30 मरीज आते हैं जो आंखों में समस्या की शिकायत करते हैं. ऐसा स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल के कारण होता है. एक साल पहले तक यह संख्या बहुत कम थी लेकिन पिछले कुछ महीनों यह संख्या काफी बढ़ गई है.
दो महिलाओं ने रोशनी गंवाई
लंदन. ए. अंधेरे में देर रात तक मोबाइल चलाने की वजह से दो महिलाएं अपनी आंखों की रौशनी गंवा चुकी हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक पहली मरीज इंग्लैंड की 22 वर्षीया महिला है. अपने करीब मोबाइल रखकर सोने वाली इस महिला ने बताया कि वह अक्सर बाएं करवट होकर लेटती थी और दाहिने आंख से मोबाइल देखती थी. सामान्यत: उसकी बाईं आंख तकिये से कवर होती थी. 40 साल की दूसरी महिला भी बिल्कुल ऐसी ही समस्या से जूझ रही हैं. लंदन के मूरफिल्ड्स आई हॉस्पिटल के ओप्थेलेमोलॉजिस्ट ओमर माहरू कहते हैं, दोनों ही मरीज महिलाएं वर्षों से बिस्तर पर रहते हुए एक आंख से मोबाइल देख रही थीं. दरअसल, तब वे उनींदी अवस्था में होती थीं. यही वजह है कि दोनों को एक-सी समस्या से दो-चार होना पड़ा. एक ही समय में उनका एक रेटीना अंधकार और दूसरा रौशनी में काम कर रहा था. ओमर माहरू आगे कहते हैं, हम इंसानों का रेटीना बेहद आश्चर्यजनक ढंग से काम करता है. एक ही समय में यह कई स्तर की रौशनी को एडेप्ट और कैप्चर कर सकता है, किसी कैमरे से भी बेहतर अंदाज में लेकिन इसका हर्जाना भी हमें भुगतना पड़ता है जैसा कि दोनों महिलाओं को भुगतना पड़ा.
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