जीवित माटी अभियान पर निकले जमुई के किसान

jamui jiwit  mati abhiyan
मुन्ना कुमार झा. जमुई।
एक तरफ जहां सूबे में हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है तो वहीं दूसरी ओर आज से केड़िया जीवित माटी किसान समिति के सदस्य 5 दिनों की किसान माटी यात्रा पर निकले हैं। यह माटी यात्रा अगले 5 दिनों तक जमुई के 12 गांवों में जाएगी और किसानों को मिट्टी का स्वास्थ्य बचाने के तरीकों और फायदों  तथा जैविक खेती के बारे में जागरूक करेगी।
ग्रीनपीस इंडिया और जीवित माटी अभियान दल के सदस्य इश्तियाक अहमद ने कहा कि, दुनिया भर के कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अगर फौरन मिट्टी के बिगड़ते स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया गया और मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़Þाने के प्रयास नहीं शुरू किए गए तो जल्दी ही हमारी खेती, उससे जुड़े रोजगार और खाद्य सुरक्षा को भयानक संकट का सामना करना पड़ेगा और इसका सबसे बुरा असर हम किसानों पर ही पड़ेगा। यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र संघ और खाद्य एवं कृषि संगठन ने वर्ष 2015 को अंतर्राष्ट्रीय मिट्टी वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है ताकि दुनिया भर में मिट्टी के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर एक व्यापक जनांदोलन शुरू हो और देशों और राज्यों की सरकारें स्थिति को सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाएँ।
गौरतलब है कि पिछले एक साल से ग्रीनपीस इंडिया और जीवित माटी किसान समिति के संयुक्त प्रयास से जिले के बरहट ब्लॉक स्थित केड़िया गाँव के सभी किसानों ने जैविक खाद बनाना और उनका इस्तेमाल करना शुरू किया है। वर्मी खाद के अलावा गौमूत्र, नीम की पत्ती, गोबर, बेसन, लहसुन, हरी मिर्च, खैनी का डंठल, धतूरे की पत्ती और फल आदि के इस्तेमाल से अपनी फसलों के लिए कई तरह की टॉनिक और दवाइयाँ बनाना सीखा है और उनके इस्तेमाल से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर आने वाले खर्चों को 60% से 100% तक कम किया है। उनके खेत की मिट्टी पहले से मजबूत हुई है और उसकी उत्पादन क्षमता में सुधार आना शुरू हो गया है।
यह विदित है कि जलवायु परिवर्तन से हो रहे मौसम परिवर्तन का सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को ही झेलना पड़ रहा है। जिले के किसानों को लंबे समय से जैविक खेती के लिए जागरूक करते आ रहे जीवित माटी किसान समिति के सदस्य संतोष कुमार सुमन ने माटी यात्रा के दौरान कहा कि, आज जब देश भर में किसान अपने फसल की बबार्दी पर मुआवजे की मांग को लेकर दर दर भटक रहे हैं वहीं हमारे जिले में किसान जलावायु परिवर्तन के बढ़Þते प्रभाव से निपटने के समाधान खोजने के लिए संगठित प्रयास कर रहे हैं। सभा को जानकी तांती, मुन्नी यादव, रुक्मिणी देवी, सुनीता देवी, गंगिया देवी,  संतोष कुमार सुमन, अनछ यादव आदि ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मनोज तांती, राजकुमार यादव, अनंदी यादव, चुन्नी यादव, दशरथ तांती आदि उपस्थित थे।






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