जेल के अंगूठा छाप कैदी भी बोलने लगे अंग्रेजी!

chanawe jail gopalganj
गोपालगंज। जेल में बंद कैदियों के जीवन में प्रेरणा कार्यक्रम के तहत चलाए गए नव साक्षरों के सत्र के समापन के मौके पर अंगूठा छाप रामचंद्र काका भी अंगरेजी बोलने लगे। कल तक इनकी गिनती असाक्षर के रूप में होती थी, आज साक्षर बन चुके हैं। साक्षर बने प्रतिभागियों को एक कार्यक्रम में पुरस्कृत किया गया।
राज्य संसाधन समूह के सदस्य एसआरजी सुनील कुमार द्विवेदी ने नव साक्षरों में उत्साह भरते हुए कहा कि साक्षर समाज हिंसक नहीं हो सका। वह क्रोध पर नियंत्रण रखता है। सही-गलत का मूल्यांकन करते हुए निर्णय लेता है। बेशक आप सभी कैदी कहीं-न-कहीं हिंसक प्रवृत्तियों के कारण आज जेल में हैं। साक्षर होते तो यह दिन नहीं आता। क्या आप अपने परिवार पत्नी, मां, पिता के संबंध में उनकी मन:स्थिति के बारे में सोचते हैं। उन मासूम बच्चों के बारे में आपने कभी सोचा है। उनमुक्त बचपन मां-पिता के अभाव में एक जीवन जीने को विवश होता है। मुख्यमंत्री अक्षर आंचल योजना के तहत जेल में बंद कैदियों को साक्षर बना कर उनका कौशल विकास कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का पहल की गई है।






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