नीतीश व आडवाणी के खिलाफ केस नहीं करने पर फंसे थानेदार

नीतीश व आडवाणी के खिलाफ केस नहीं करने पर फंसे थानेदार

आरा..लालू व राबड़ी के शासन काल के समय बिहार में अपहरण उद्योग की स्थापना के बारे में सीएम नीतीश कुमार और पूर्व उपप्रधान मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा बयान देने के मामले में आरा के एक थानेदार बुरे फंस गये हैं। दोनों नेताओं के खिलाफ थाने में केस दर्ज नहीं करने के मामले में कोर्ट के आदेश की अवहेलना हुई। इसलिए कोर्ट ने नगर थाने के थानेदार को स्वयं पर केस करने के लिए आदेश दिया है।

सीजेएम कोर्ट में दर्ज हुआ था मामला

बिहार विधानसभा 2010 के चुनाव में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी व नीतीश कुमार ने बिहार में लालू-राबड़ी राज के दौरान अपहरण उद्योग होने का बयान दिया गया था। अधिवक्ता सत्यव्रत ने इस बयान के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में मामला दर्ज कराया था। तत्कालीन सीजेएम ने इस मामले में नगर थाना के थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। लेकिन पांच साल गुजरने के बाद वर्ष 2015 में पुलिस ने अधिवक्ता द्वारा लगाये गये आरोप को गलत साबित कर एक रिपोर्ट सीजेएम कोर्ट में सौंपा था।

दोबारा एफआईआर का आदेश

तत्कालीन सीजेएम ने इस रिपोर्ट के आलोक में अधिवक्ता को अपना बयान दर्ज कराने का मौका दिया ताकि इस मामले को जांच के तहत आगे बढ़ाया जा सके। अधिवक्ता ने तत्कालीन सीजेएम के इस आदेश के खिलाफ जिला व सत्र न्यायाधीश के कोर्ट में चुनौती दी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 5 दिसम्बर 2015 को आदेश पारित करते हुए अधिवक्ता के दलील को सही पाया और इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। सीजेएम ने इस केस में नगर थाना के थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। एफआईआर दर्ज नहीं होने पर कोर्ट ने थानाध्यक्ष को स्मार पत्र, कारण पृच्छा व एसपी को थानाध्यक्ष का वेतन रोकने का भी आदेश दिया। बावजूद एफआईआर नहीं की गयी।

बुधवार को थानाध्यक्ष के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

इसके बाद अधिवक्ता ने बुधवार को कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर सीजेएम के कोर्ट में नगर थाना के थानाध्यक्ष के खिलाफ मामला दर्ज कराया। इस मामले में अधिवक्ता ने एसपी सहित दो को गवाह बनाया है।






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