परसेप्शन वार की राजनीति में सच सबसे नाजुक दौर में

पुष्यमित्र
रवीश भले कहते रहें टीवी कम देखीये, मगर गांव आकर पता चल रहा है, टीवी वाले अपना काम बखूबी कर चुके हैं।
यहां सबको मालूम है कि प्रधान मंत्री मोदी ने पकिस्तान को धूल चटा दी है। पकिस्तान ने उनके दहशत में आकर अभिनंदन को छोड़ा है। पूरी दुनिया में मोदी जी की तूती बोल रही है। और तो और पटना की संकल्प रैली में ऐसी भीड़ उमड़ी थी जैसी कई वर्षों में नहीं उमड़ी। अगर आप इन बातों पर असहमति जताते हैं तो जाहिर सी बात है आप देशद्रोही हैं।
सच यही है कि भारतीय मीडिया इन दिनों प्रोपोगेंडा मशीन बना हुआ है। हम चार फ़ेसबुकीयों को समझा सकते हैं, करोडों वोटरों तक जो मैसेज पहुंचना था, पहुंच गया। इस दौर में कोई भी पत्रकार किसी एक सच को इस्टेब्लिश करना चाहे तो सबसे पहले उसे इतना बड़ा मीडिया नहीं मिलेगा जहां से वह अपनी बात करोड़ों लोगों तक पहुंचा सके। ले देकर फेसबुक, ट्विटर, यू टयूब बचता है। वहां सरकारी सेनानियों की फौज सच को झूठ साबित करने और सच बोलने वालों को मानसिक रूप से परेशान करने के लिये है।
यह परसेप्शन वार है और इसमें सच की स्थिति सबसे नाजुक है।
 
(पुष्यमित्र के फेसबुक टाइल लाइन से साभार)





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