पटना फ्लाईओवर के मामले में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की तरफ

#पटना फ्लाईओवर के मामले में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की तरफ बढ़ रहा है।
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इतिहास में कोई भी राजा अपने राजधानी को सपनों का शहर बनाना चाहता है। कोई – कोई तो सपनों की सनक में राजधानी तक बदल देता है। हालांकि लोकतंत्र में ऐसे उदाहरण नहीं है। किन्तु राज्य की राजधानी खूबसूरत हो ऐसा कौन नहीं चाहेगा?

मौर्य काल को छोड़ दें तो बिहार की राजधानी कभी दर्शनीय नहीं रही है। पटना चंडीगढ़, बेंगलुरु, भुवनेश्वर की तरह संजीदगी से बसाया गया शहर भी नहीं है। यह आधुनिक काल के चांदनी चौक की तरह तंग शहर है।

पटना शहर की पहचान कंक्रीट के जंगल से ज्यादा नहीं था। पटना की घनी आबादी, जल निकासी की कुव्यवस्था, संकरी सड़क, सड़क पर गंदगी, घूमने के लिए एकमात्र गांधी मैदान, देखने के गोल घर और तारा मंडल पटना की ऐसी ही तस्वीर उभरती थी। किन्तु अब पटना में घूमेंगे तो कुछ हद तक संतुष्ट होंगे कि यह बदल रहा है। 

आज पटना में माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी की सरकार ने लगभग दो दर्जन फ्लाईओवर बनवाएं है। कारगिल चौक से पीएमसीएच होते हुए अशोक राजपथ को डबल डेकर फ्लाईओवर बनाने के अलावा पटना में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट पाइपलाइन में है।

अपने आकार के शहरों में पटना भारत का सबसे अधिक फ्लाईओवर वाला शहर बन चुका है। Patna: The City of Flyovers बन चुका है। पटना शहर की बहुत सारी चुनौतियां है। पटना की कई गलियां तो गांवों की गलियों की तरह संकरी है। नियमों के मुताबिक अपार्टमेंट में पर्याप्त ग्रीन जोन, ओपन एरिया नहीं बनते है।कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स है, किन्तु पार्किंग एरिया में कंजूसी है।

जनसंख्या का भार होने के कारण ट्रैफिक जाम तो होगा, या शहर के कई संस्थानों को पटना से बाहर की तरफ ले जाना पड़ेगा।

पटना की बसावट ऐसी है कि कई जल निकासी के माध्यम बंद हो चुके हैं। कई पोखर गायब हो चुके हैं। अव्वल तो पटना कटोरे की तरह भूमि पर बसा हुआ है। जिसके कारण पटना ने बाढ़ जैसी स्थिति का भी सामना किया है। खबर है कि बाढ़ से चेती सरकार ने 22 संप हाउस बनाया है। पटना में अब जल जमाव असंभव जैसा है।

पटना में पार्क के नाम पर गांधी मैदान था। नीतीश सरकार के आने के बाद हर इलाके में छोटे – छोटे पार्क है। नीतीश सरकार ने इको पार्क, बुद्धा पार्क, गंगा ड्राइव, सभ्यता द्वार, शानदार विश्वस्तरीय म्यूजियम बनवा कर पटना को दर्शनीय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

लेकिन इन तमाम कामों में सबसे शानदार काम फ्लाईओवर का हुआ है। पटना को अगले 5-7 साल में एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर से ही निहारा जा सकेगा। पटना की घनी आबादी के कारण यह बेहद जरूरी भी है। विजनरी राजनेता माननीय नीतीश कुमार जी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद ही पटना की चुनौतियों को पहचान लिया था। शायद इसलिए भी आज पटना दौड़ रहा है।

फ्लाईओवर के संबंध में कोई विभागीय स्टेटमेंट तो नही है। किन्तु नज़र दौड़ाए तो पटना में दो दर्जन से अधिक फ्लाईओवर बन चुके हैं। यहां पटना में फ्लाईओवर की एक सूची है जिसमें अधिकांश पटना को रफ्तार दे रहे हैं तो कुछ के कार्य प्रगति पर है।

दानापुर फ्लाईओवर, दीघा-एम्स फ्लाइओवर, बेली रोड रेल फ्लाईओवर, दीघा फ्लाईओवर, बेली रोड-राजा बाजार फ्लाईओवर, चितकोहरा फ्लाईओवर, सचिवालय हाल्ट फ्लाईओवर, करबिगहिया फ्लाईओवर, पटना स्टेशन रोड फ्लाईओवर, एक्जीविशन रोड फ्लाईओवर, चिरैयातांड फ्लाईओवर, मीठापुर फ्लाईओवर, राजेंद्र नगर फ्लाईओवर, बहादुरपुर फ्लाईओवर, कुम्हरार फ्लाईओवर, सिपारा फ्लाईओवर, बाईपास बस स्टैंड फ्लाईओवर, जीरो माइल फ्लाईओवर, अगम कुआं फ्लाईओवर, पटना साहिब फ्लाईओवर, गंगा ड्राइव फ्लाईओवर। मीठापुर से महूली फ्लाईओवर। गुरुद्वारा फ्लाईओवर।

आर ब्लॉक फ्लाईओवर, लोहिया पथ चक्र फ्लाईओवर, बस स्टैंड से पटना स्टेशन के लिए फ्लाईओवर, शिवपुरी फ्लाईओवर, राजीव नगर फ्लाईओवर।

पटना को रफ्तार देने के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। संभवतः अपने आकार वाले शहरों में पटना फ्लाईओवर के मामले में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की तरफ बढ़ रहा है। आगे आगे देखिए होता है क्या।

Facebook से साभार






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