देवी देवता : जिनको पैदा होना था, वो हो लिए

कलर प्रिंटिंग प्रेस के कारण देश भर में देवता एक जैसे हो गए. राजा रवि वर्मा ने जैसी पेंटिंग बनाई, उसी के कलेंडर पहली बार बने और अब पूरा देश राम, लक्ष्मी, सरस्वती और कृष्ण को उसी रूप में जानता है, जैसा रवि वर्मा ने बनाया. जिनको पैदा होना था, वो हो लिए

फिर कुछ देवता फिल्मों ने दिए. जैसे संतोषी माता और वैष्णो देवी. ये रहे होंगे पहले भी. लेकिन इनको राष्ट्रीय फिल्मों ने बनाया.

ऑडियो और वीडिया कैसेट के जरिए वैष्णो देवी और साई बाबा गांव-गांव तक पहुंचे.

टेलीविजन युग आते आते नए देवताओं ने पेदा होना बंद कर दिया. लेकिन फिल्मों और टीवी ने कुछ त्योहारों का लोकल से राष्ट्रीय बना दिया. करवा चौथ उनमें प्रमुख है. सबऑल्टर्न लोगों का त्यौहार छठ को भी टीवी राष्ट्रीय बना रहा है. इन सब में भरपूर पोंगापंथ है.

लेकिन डिजिटल युग आने के बाद अब न तो कोई नई देवी पैदा होगी, न कोई नया देवता.

जिनको पैदा होना था, वो हो लिए.

( वरिष्ठ पत्रकार दिलिप मंडल के फेसबुक से साभार )






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