जिस डकैत के टॉर्च की रोशनी से लोग सहम जाते थे!, जानिए वह अपने बेटे की मौत पर कैसे रोया

Pushy Mitra

कल पहली दफा अवधेश मंडल की तसवीर देखी. अपने बेटे की लाश के सामने रोते हुए. अब तक उसके बारे में सिर्फ किस्से ही सुनता था. कभी सोचा नहीं था कि जब पहली दफा देखूंगा तो सूरत कुछ ऐसी होगी. क्योंकि मेरे किशोरावस्था की स्मृतियों में अवधेश मंडल की छवि किसी दबंग और क्रूर डाकू के रूप में दर्ज है, जो घोड़े पर सवार होकर निकलता है और डकैतियां करता है. दर्जनों खून का इल्जाम उसके सर है. कोसी अंचल के लोग उसके नाम के खौफ से भली भांति परिचित हैं. एक जमाने में रात के वक्त आसमान में टार्च की रोशनी चमकती थी तो अफवाह उड़ने लगती थी कि अवधेश मंडल का फैजान गिरोह आ रहा है और गांवों में लोग रोशनी बुझाकर अपने दरवाजे बंद करके सहमे-सहमे में सोने की कोशिश करने लगते थे. पिछले एक दशक में वह खौफ जरूर कम हुआ है. मगर उसकी पत्नी बीमा भारती सुशासन के राज में पहले विधायक फिर मंत्री बन गयी, भले ही वह शपथ लेने में दस बार अटकती हो.

पत्रकारिता करते वक्त अवधेश मंडल के नाम का पहली दफा सामना तब हुआ जब भवानीपुर के चंचल पासवान की पत्नी और उसके बेटे ने पुलिस में शिकायत दर्ज करायी थी कि अवधेश मंडल उन्हें चंचल पासवान की हत्या के मामले में गवाही देने से मना कर रहा है, धमका रहा है. उस मामले में पुलिस ने अवधेश मंडल को गिरफ्तार किया मगर उनकी पत्नी बीमा भारती और स्थानीय जदयू सांसद पर इल्जाम लगा कि वे थाने में जाकर अवधेश मंडल को छुड़ा लाये. उस मामले की तफ्तीश करने जब मैं गया था तो कई ऐसी जानकारियां मिलीं कि दिल परेशान हो गया.

चंचल पासवान और उसके भाई की हत्या का इल्जाम अवधेश मंडल पर था. दरअसल मामला यह था कि राजीव गांधी के वक्त में भवानीपुर के डुमरा में एक जमींदार की 110 एकड़ जमीन स्थानीय 60-70 दलित परिवारों के बीच बांटी गयी थी. उन्हें जमीन का पट्टा भी मिला था. मगर एक-दो साल जमीन जोतने के बाद अवधेश मंडल के गिरोह में उस पूरे जमीन के प्लॉट पर कब्जा कर लिया और दलितों को खदेड़ कर भगा दिया. उस वक्त चंचल पासवान और उसके भाई कैलाश पासवान ने अपनी जमीन पर अतिक्रमण का विरोध किया और जगह-जगह शिकायत करने लगे. ऐसे में 2004 में पहले कैलाश पासवान की और 2005 में चंचल पासवान की हत्या कर दी गयी.

उसी हत्याकांड का मामला 2016 में अदालत में खुला तो अवधेश मंडल चंचल पासवान की पत्नी और उसके पुत्र सुनील पासवान को धमकाने पहुंच गये कि अदालत में कुछ कहा तो तुम्हारा भी वही हाल होगा जो तुम्हारे बाप और चाचा का हुआ था. दिलचस्प है कि 2015 में बिहार सरकार ने ऑपरेशन दखल दिहानी की शुरुआत की थी इसके तहत उन लोगों को अपनी जमीन पर कब्जा दिलाना था, जिनको जमीन का पट्टा तो बंटा है, पर उनकी जमीन पर कब्जा किसी और का है. इसी कोशिश में जब भवानीपुर प्रखंड के सीओ ने उस 110 एकड़ जमीन को कब्जामुक्त करने की कोशिश की तो अवधेश मंडल ने प्रखंड कार्यालय में घुसकर सीओ की पिटाई की. सरकार की हिम्मत नहीं हुई इसका विरोध करे. 2016 में अपने पति को थाने से भगाने के बाद भी बीमा भारती की जदयू में हैसियत वही रही. संतोष कुशवाहा तो सांसद हैं ही.

दिलचस्प है कि बीमा भारती ने भले ही अपने पति की कानून के हिरासत से भगाने में मदद की हो, मगर अवधेश मंडल का बीमा से रिश्ता बहुत बेहतर नहीं है. कई बार ऐसी शिकायतें मिली हैं कि अवधेश मंडल ने बीमा भारती की पिटाई की है. इस बीच तो अवधेश मंडल ने दूसरी शादी भी कर ली है, उस पत्नी का नाम गुड़िया है. ऐसे चरित्र को रोते हुए देखकर भला कौन चकित नहीं हो जायेगा. मगर पुत्रशोक होता ही ऐसा है.

नोटनीतीश जी की पार्टी में ऐसे चरित्रों की कमी नहीं है. बीमा के अलावा लेसी सिंह का पति भी अपने जमाने में खूंखार बदमाश था. खगड़िया के रणवीर यादव से नीतीश की नजदीकियां हैं, जिनकी दोनों पत्नियां राजनीति में सक्रिय हैं. खबर है कि अनंत सिंह की फिर से जदयू में एंट्री होने वाली है. मुन्ना शुक्ला भी उनके पसंदीदा दबंगों में से एक हैं. और भी कई नाम हैं. सुशासन बाबू का यह अलग किस्म का चेहरा है. इसलिए उन्हें मुजफ्फरपुर के मामले में तीन माह बाद शर्म आती है.






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