सबका अपना सावन !

Dhru Gupt

सावन का आरम्भ हो गया है। सावन बारिशों का महीना है जब महीनों की झुलसाती धूप और ताप से बेचैन धरती की प्यास बुझती हैं। सावन जहां पृथ्वी और बादल मिलकर सृष्टि और हरियाली के नए-नए तिलिस्म रचते हैं। सावन की झोली में सबके लिए कुछ न कुछ है। कृषकों के लिए यह धरती की गोद में फसल के साथ सपने बोने का का महीना है। प्रेमियों के लिए यह बसंत के बाद प्रेम के लिए दूसरा सबसे अनुकूल मौसम है। साहित्य आदि काल से सावन में प्रेमियों के मिलन की चर्चाओं से उजला और उनके विरह की व्यथाओं से गीला होता रहा है। बच्चों के लिए यह उमंग और उल्लास के दिन हैं। लड़कियों के लिए सावन झूले में बैठ कर आकाश नापने का मौका है। नव विवाहिताओं के लिए यह कजरी गीतों और मायके में छूट गए रिश्तों को याद करने का मौसम है। बूढ़े-बूढ़ियों के लिए बिस्तर पर लेटे-लेटे चाय की चुस्कियों के साथ अतीत की यादों में डूब जाने का समय है। धार्मिक दृष्टि से हिन्दू शास्त्रों में सावन को भगवान शिव का माह कहा गया है। प्राचीन काल में देवताओं और असुरों के समुद्र-मंथन का संयुक्त अभियान सावन के महीने में ही आरंभ और समाप्त हुआ था। समुद्र-मंथन से जो चौदह रत्न मिले थे उनमें से तेरह रत्न देवताओं और असुरों ने आपस में बांट लिए। चौदहवे रत्न विनाशकारी हलाहल विष का कोई दावेदार नहीं था। सृष्टि को इस घातक विष के प्रभाव से बचाने के लिए शिव ने स्वयं यह जहर पीना स्वीकार किया और नीलकंठ बने। उनके शरीर में विष का ताप कम करने के लिए देवताओं ने दूर-दूर से गंगाजल लाकर उनका अभिषेक किया। तब से सावन में शिव भक्तों द्वारा पवित्र नदियों से जल लेकर भारत के ज्योतिर्लिंगों और शिव के दूसरे मंदिरों में चढाने की परंपरा रही है। जीवन से उदासीन जिन थके-हारे लोगों के लिए सावन कुछ नहीं, उनके लिए भी जीवन को कई-कई रूपों में अंकुरित होते हुए देखने का अवसर तो है ही।

 






Related News

  • विशेष व्यक्तित्व अटल बिहारी बाजपेयी
  • 15 अगस्त की तारीख
  • (सीवान) शहीद स्मारक स्थल आज बाजारों के नाम से बेशुमार
  • डार्क हॉर्स का लेखक और लॉज मालिकों की दबंगई
  • चंद्रशेखर टू नीतीश कुमार से इतर हरिवंशजी की राजनीतिक चेतना
  • जिस डकैत के टॉर्च की रोशनी से लोग सहम जाते थे!, जानिए वह अपने बेटे की मौत पर कैसे रोया
  • मधेपुरा : समाजवादियों की धरती या फिर मंडल की धरती
  • लागा लंगोट में दाग
  • Comments are Closed

    Share
    Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com