श्रीदेवी अनैतिक और रिश्ते को तार-तार करने वाली अभिनेत्री महान कैसे!

श्री देवी ने अपनी सहेली मोना से उसके पति को छीना
जिसे बांधती थी राखी, उसी भाई से श्री देवी ने की थी शादी
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विष्णुगुप्त

यह कैसी भारतीय परमपरा है कि अनैतिक और रिश्ते को तार-तार करने वाली प्रक्रिया के सहचर और देह उघाडू-देहफाडू प्रदर्शन करने वालों को भी मरने पर महान, अद्वितीय और प्रेरक करार दिया जाता है, उसके अपराध को और उसकी अनैतिकता पर पर्दा डाल दिया जाता है। जिस श्री देवी की मौत पर इतने गमगीन हुए लोग, और उसे महान बताने वालों को मोना याद भी नहीं आयी होगी। मौना कौन थी? मोना श्री देवी की सहेली और मार्गदर्शक थी, मोना बोनी कपूर की पहली बीबी थी। मोना ने ही अपने पति से श्री देवी को मिलवाया था, मिस्टर इंडिया में हिरोइन का रोल श्री देवी को मोना की ही पैरबी पर मिली थी। जिस मोना ने हिन्दी फिल्मों में श्री देवी की मार्गदर्शक बनी थी और अपनी बहन की तरह ही संभाल कर रखा था उसी मोना के पति बोनी कपूर को मोना से श्री देवी ने छीन लिया था। मोना को तलाक दिलवाकर श्री देवी ने बोनी कपूर से शादी कर ली थी। मोना आज अपनी भूल जरूर पचता रही होगी और श्री देवी जैसी अनैतिकता की खिलाडी से पूरी जिंदगी आहत रहेगी। दूसरा किस्सा तो और भी खतरनाक है, भाई-बहन के रिश्तों को तार-तार करने वाला है। बोनी कपूर को श्री देवी रक्षाबंधन पर राखी बांधती थी और अपना भाई मानती थी। जब मिथुन चक्रवर्ती ने श्री देवी के साथ अंतरगता के दौरान बोनी कपूर पर प्रश्न करता था तब श्री देवी यह कह कर खामोश कर देती थी बोनी कपूर उसका भाई है और उसे वह राखी बांधती है। उल्लेखनीय है कि एक समय मिथुन और श्री देवी की अंतरंगता काफी कुख्यात थी। श्री देवी की मौत का कारण नशा और अति थकान है। जिस समय उसकी मौत हुई थी उस समय वह अत्यधिक नशे में थी और अत्यधिक नशे में पार्टी के दौरान थकान भारी थिरकन उसकी थी। अब आप श्री देवी के संबंध में क्या विचार रखेंगे?

श्री देवी की देशभक्ति के क्षेत्र में योगदान कोई बताये
देहफाडू प्रदर्शन को कला कहने वालों में मैं नही हूं
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विष्णुगुप्त

श्री देवी का देशभक्ति के क्षेत्र में क्या योगदान है? क्या उसने फिल्मों में माफिया राज का विरोध किया था? क्या श्रीदेवी ने दाउद इब्राहिम की गुडागर्दी के ख्लिाफ बोली थी? उस काल मे कौन सी ऐसी अभिनेत्री थी जो दाउद इब्राहिम की उंगलियों पर नहीं नाचती थी या फिर दाउद इब्राहिम की सहचर न थी? श्रीदेवी जब आयी तो अपनी देहफाडू प्रदर्शन से वैेेेेसे लोगों के बीच छाई थी जो देहदर्शक के सहचर थे। अगर आप देहफाडू प्रदर्शन को कला मानते हैं, तब मुझे कुछ नहीं कहना है। श्री देवी कौन सी भारत नाट्यम और अन्य भारतीय नाट्यम कला की परांगत थी , या उसके उन्नयन में लगी थी। मृत्यु सत्य है। पर मृत्यु पर इतनी संवेदना और हायतौबा क्यों? श्री देवी की मौत एक सामान्य श्रृष्टि की प्रक्रिया है। मेरे जैसे लोग श्री देवी की मौत को सामान्य घटना ही मानेंगे। मैं उसी को श्रद्धांजलि दे सकता हूं जिनक योगदान देशभक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय है। मैं मृत्यु पर भी सच ही बोलना सीखा है। शेष आप समझदार हैं
(वरिष्ठ पत्रकार विष्णुगुप्त के फेसबुक टाइमलाइन से साभार)






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