लूट का अड्डा बना बिहार का नामी जंक्शन, वर्दी वाले देखते हैं बस तमाशा!

करोड़ों की कमाई करने वाला जंक्शन पर मिलता है पीने के लिए केवल गंदी

सुविधा मिलती नहीं केवल होता है रेल यात्री से अवैध वसूली
बिहार कथा न्यूज नेटवर्क
बरौनी(बेगूसराय). देश का लाईफ लाईन कहें जानें वाला रेल अब केवल अवैध कमाई का सेफ जोन के रूप मे जाना जाता है. बताते चलें कि ये सिस्टम लागू होता है बरौनी जंक्शन पर जहां सुविधा तो रेल यात्रियों को मिलते नहीं मगर रेल यात्रियों से रेलवे पार्किंग के ठेकेदार, मोटरसाईकिल स्टैण्ड के ठीकेदार, शौचालय के ठेकेदार द्वारा रेल यात्रियों का शोषण होना आम बात हो गया है। बताते चलें कि रेलवे के द्वारा केवल करीब चार से पांच सौ फीट ही पार्किंग के लिए दिया गया है मगर रेलवे पार्किंग के ठीकेदार के द्वारा करीब – करीब रेलवे स्टेशन के बाहर का सभी जगह पर कब्जा कर रखा है। यहां तक कि बरौनी रेलवे के मजिस्ट्रेट के आवास , रेलवे डीएसपी के आवास के सामने भी रेलवे ठीकेदार के द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। और अवैध पार्किंग मे सैकड़ों टेंम्पू,ऐम्वेस्टर कार, कमांडर जीप, वोलेरो, स्कारपियों खड़ी रहती है । और तो और रेलवे के द्वारा कहीं से व्यवसायिक का सामान मंगाना भी महंगा जान पड़ता है क्योंकि पहली बुकिंग कराने मे व्यापारी को रूपयें देने पड़ते हैं उसके बाद पार्सल को छुड़ाने मे कुछ मिठाई के नाम पर अवैध रूपयें वसूली की जाती है । फिर जब पार्सल छुड़ा कर व्यापारी ले कर चलते हैं तो जितना सामान उतना ज्यादा समान का भी बैरियर वसूली की जाती है वो भी एक गठरी की दस रुपए की हिसाब से लिया जाता है । बाहर से कोई गाड़ी अगर बरौनी जंक्शन पर आकर रेल यात्रियों को ट्रेन मे चढ़ाना भी दुर्लभ हो गया है । एक गाड़ी साठ रूपया के हिसाब से वसूली की जाती है । वहीं ठीकेदारी टेंडर मे जो गाड़ी रेलवे पार्किंग मे गाड़ी खड़ी करेंगा उसी से पार्किंग लेने का नियम बना है, बरौनी जीआरपी,आरपीएफ, के अधिकारी मूकदर्शक बनी रहती है, ठीकेदार का पहुंच तो इससे मालूम होता है कि मजिस्ट्रेट आवास, रेलवे डीएसपी के आवास के सामने भी पार्किंग ठीकेदारों के द्वारा गाड़ी खड़ी करवाई जाती है । और दर्जनों दुकान अवैध खुला हुआ है मगर कोई अधिकारी कार्रवाई नहीं करके केवल संरक्षण देने मे लगें रहते हैं । केवल चाय दुकानदार , गुटका दुकानदार,पान दुकानदार, का काम है केवल एक चाय या पान अधिकारी को खिलाते रहना है । वहीं मोटरसाईकिल से कभी बरौनी जंक्शन अगर आना पड़े तो जबरदस्ती उस मोटरसाईकिल ,स्कूटी, साईकिल को उठाकर स्टैंण्ड मे लगा लिया जाता है और सैकड़ों रूपया जुर्माना करके वसूली करने के बाद उसे छोड़ा जाता है ।

बताते चलें कि अगर किसी दिन सोनपुर के जीएम या डीआरएम का बरौनी रेलवे स्टेशन पर आगमन होता है तो स्टेशन के अधिकारी को पहले जानकारी मिल जाती है और सभी गाड़ी, दुकानदार को कहकर दुकान , गाड़ी को खाली करवाया जाता है जिससे सिनियर अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं लग सकें। वहीं बरौनी जंक्शन पर बुनियादी सुविधाएं नदारद है स्टेशन पर यात्रियों को तरह- तरह की असुविधाओ का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा असुविधा शौचालय की है । प्लेटफार्म नंबर 2.3.8.9 पर शौचालय नहीं होने के कारण रेल यात्रियों को बराबर शर्मसार होना पड़ता है ।प्लेटफार्म नंबर 4.5.6.7 पर जो शौचालय है वह भी ( पे एंड यूज ) का है रेल द्वारा निर्धारित रकम से अधिक रकम वसूली जाती है । शौचालय जाने पर पांच से दस रूपए तक की वसूली की जाती है । और जो प्लेटफार्म पर शौचालय नहीं है उन्हें खुलें मे शौच जाना पड़ता है या अत्यधिक रूपए देकर दूसरे प्लेटफार्म पर जाना पड़ता है। वहीं स्वच्छता के नाम पर जीआरपी, आरपीएफ, के द्वारा उन्हें पकड़ा भी जाता है और कुछ से जुर्माना की वसूली की जाती है और कुछ का पकड़ने के बाद वही मामला लेन – देन कर खत्म किया जाता है । बताते चलें कि प्लेटफार्म पर पानी की जो टंकी से पानी निकलता है वह भी गंदगियों से भरा रहता है । पानी की जो टंकी है जिसमें पानी जमा होता है उसका सफाई साल दो साल मे कभी कभार होता है । यात्रियों को इसी टेप से गंदी पानी पीने को मिलता है । नहीं तो बोतल बंद पानी पीने को मजबूर है रेलयात्री । वहीं रेल यात्री ने प्रेस को बताए कि जब सीनियर अधिकारी का आगमन पर केवल बाहर से साफ – सफाई किया जाता है । विदित हो कि उसी तरह प्लेटफार्म दो और तीन पर रेल यात्रियों को सर्दी ,गर्मी, या बारिश सभी मौसमों मे खुल आसमान मे ही ट्रेन का इंतजार करते देखा गया है । बताते चलें कि प्लेटफार्म की कुल लंबाई 950 मीटर है मगर केवल 50 मीटर पर ही छत उपलब्ध है । रेल मंत्रालय के द्वारा सफाई के नाम पर करीब सलाना डेढ़ करोड़ रूपयें खर्च करने के लिए आता है , मगर केवल फाइल मे ही सिमट कर कुल राशि रह जाता है । सफाई के नाम पर केवल दुर्गंध , सड़न , शाम हुआ नहीं मच्छरों का प्रकोप बढ़ा हुआ देखा गया । जबकि केवल खानापूर्ति के लिए महीने पन्द्रह दिन मे रेलवे के उच्च अधिकारियों का बरौनी जंक्शन आते – जातें रहते हैं लेकिन वे भी सफाई के प्रति संवेदनशील नहीं हैं । वहीं कुछ ग्रामीणों ने नाम नहीं छापने के क्रम मे बताया कि केवल दिखावा करने के लिए सीनियर अधिकारी आतें हैं । पार्किंग के नाम पर लूट हो रहा है ठीकेदार के द्वारा ये भी दबे जुवान कहना होता है कि जो भी जंक्शन के वरीय अधिकारी हैं उन्हें कहीं जाना होता है तो गाड़ी उपलब्ध कराया जाता है वो भी फ्री मे जो भी सिनियर अधिकारी के आगमन पर जो भी खर्चा होता है वो सब यही ठीकेदारों के द्वारा वहन किया जाता है । मगर स्थिति जो भी हो रेलवे मे ये कहावत सटीक है ( राम नाम का लूट है लूट सके तो लूट, अंतकाल पछताऐंगा जब प्राण जाऐंगा छूट ) बरौनी जंक्शन से करोड़ों की कमाई देने वाला जंक्शन केवल लूट का अड्डा बन चुका है।






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