दलित पिछडों को नहीं, लेकिन सवर्णों के सात खून यूं ही माफ हैं. आखिर क्यों…यह पढिए और जानिए

दिलीप मंडल
क्या आपने कभी सोचा है कि ज्यादातर SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक अफसर बेईमान क्यों नहीं है?
किसी दफ्तर में इन समूहों के कर्मचारी और अफसर सबसे कम रिश्वतखोर क्यों होते हैं? सवर्णों के बराबर वेतन के बावजूद एक बहुजन अफसर की गाड़ी छोटी क्यों होती है? इनके मकान छोटे क्यौं होते हैं? यह जानने के लिए एक सवाल का जवाब दीजिए. योगी आदित्यनाथ ने अपने ऊपर लगे मुकदमे हटा लिए. अमित शाह ने भी केंद्र में सरकार बनने के बाद यही किया. यही सुविधा शिबू सोरेन, लालू प्रसाद, बहन मायावती, छगन भुजबल आदि को क्यों नहीं है? वे भी तो लगातार सत्ता में रहे. केंद्र में भी इनके समर्थन से सरकारें चलीं. इनके मुकदमे चलते क्यों रहे. जाहिर है कि ये लोग भारत के सबसे करप्ट और मालदार नेता नहीं हैं. लेकिन ये ही क्यों उलझ जाते हैं?
इस प्रश्न के जवाब में भारतीय समाज का सबसे बड़ा राज छिपा है.
यही जानते ही आपको समझ में आ जाएगा कि तरक्की करने के मौके कुछ लोगों के पास ज्यादा क्यों हैं, कुछ लोग धड़ल्ले से करप्शन कैसे कर लेते हैं और बच भी जाते हैं. वहीं आपके पास करप्ट होने का विकल्प क्यों नहीं है. बहुजनों की मजबूरी है कि वे ईमानदार रहें, ईमानदार नजर भी आएं क्योंकि वे निर्दोष होकर भी फंस सकते हैं. सवर्णों के सात खून यूं ही माफ हैं. आम तौर पर कोई शिकायत ही नहीं करेगा. शिकायत हो भी गई तो बड़ा अफसर, जो आम तौर पर सवर्ण होगा, आपको बचा लेगा. सीबीआई और ऐंटी करप्शन में इनके लोग बैठे हैं, बचा लेंगे. गलती से मामला कोर्ट में चला गया तो कोई सवर्ण जज इसकी सुनवाई करेगा, इसके काफी मौके हैं. वह बचा लेगा. इन्हें आपनी जाति का रसूख वाला वकील मिल जाएगा.
इसके अलावा करप्शन का पैसा छिपाने के लिए एक तंत्र की जरूरत होती है. इसके लिए विदेशों में आपके रिश्तेदार होने चाहिए जो हवाला से काला को सफेद करने में आपकी मदद करें. आपके या रिश्तेदारों के पास NGO होना चाहिए, जिसके जरिए हेराफेरी हो सके. NGO को बचाने के लिए ऊपर अफसर होने चाहिए. आपके या रिश्तेदारों के पास कंपनियां होनी चाहिए. तब काला पैसा खपा पाएंगे. मतलब कि यह सारा तंत्र जिनके पास नहीं है, वह करप्शन का बड़ा पैसा छिपा ही नहीं पाएगा.
यह तंत्र भारत में किस सामाजिक समूह के पास है? ऊपर कौन बैठा है जो आपको बचा लेगा. सुप्रीम कोर्ट में एक दलित जज नहीं है. आपको बचाएगा कौन? जाहिर है आपको सजा का डर होगा. आप करप्ट हो ही नहीं सकते. हो भी गए, तो जेल जाएंगे.

(वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल के फेसबुक पेज से साभार )






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