जहां भय का साम्राज्य है, वहीं नहीं जाती सीआरपीएफ

jamui crpfनिरंजन उपाध्याय. बिहार कथा
चंद्रमंडीह.जुमई। शहरों की सैर करने में सबको मन लगता है मगर पहाड़ के तलहटियों के बीच रहने वाले लोगों की जान तलहटियों पर रखकर करने वाले लोगों के बीच फ्लैग मार्च नहीं किया जाता है। ऐसे तो पकड़ धड़ अभियान या कुछ घटना घटने पर सीआरपीएफ के जवान बड़े-बड़े पदाधिकारियों के साथ पहाड़ के कंद्राओं में बसे आदिवासी और बनवासियों के बीच जाते तो है मगर उनके दिल में बसे भय का माहौल को निकालने में सक्षम नही हो पा रहे है। यदि सीआरपीएफ के जवान अति अत्याधुनिक हथियार से लैस है तो लोगों के बीच जाकर भय को दूर करना होगा तभी तो लोगों के बीच शांति व्यवस्था कायम रह सकती है। चकाई में एक सौ से अधिक की संख्या में सीआरपीएफ के जवान प्रतिदिन फ्लैग मार्च करते देखे जाते है, लेकिन जहां लोगों को भय सताती है, वहां पर सीआरपीएफ के जवान नहीं पहुंचते है। इधर सीआरपीएफ के एसआई डीबी भोज के नेतृत्व में शांति व्यवस्था कायम करने हेतु चकाई की सड़कों पर बराबर फ्लैग मार्च करते देखा जाता है।






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