फफोले व पुलिस के डंडे के निशान मिट जाएंगे साब,अब अपनी माटी में ही कमाएंगे रोटी!

😢सब धरती कागद करौं , लेखनी सब बनराय ।
सात समुद्र की मसि करौं , मजदूरों की व्यथा लिखा न जाय 😢
-पैर के फफोले व पुलिस के डंडे के निशान मिट जाएंगे साब,अब अपनी माटी में ही कमाएंगे रोटी!

गोपालगंज। मनीष कुमार भारतीय। भाई आदमी हूं। लोहा नहीं। आग में तो लोहा भी पिघल जाता है। इस मुसीबत में जिंदा हूं तो यह ऊपर वाले की रहम है। पचास दिनों से जीने की जद्दोजहद कर रहा हूं। गाजियाबाद से लेकर यहां तक। घर पहुंच गया तो फिर नया जन्म मानूंगा। कुछ दिनों में पैर के फफोले ठीक हो जाएंगे। पुलिस के डंडे के निशान भी मिट जाएंगे। फिर अपनी ही माटी में रोटी की तलाश करूंगा। ये शब्द हैं आरा के दिनेश राय के। बलथरी चेक पोस्ट पर पहुंचे दिनेश ,उसकी पत्नी व बच्चों के चेहरे धूप में स्याह पड़ गए थे। कपड़े पसीने से तर बतर थे। पसीने को पोंछते हुए वह अपनी व्यथा कथा सुनाने लगा। घर नहीं लौटता तो क्या करता। आप ही बताइए । बिना अन्न के कैसे जिंदा रहते। ये बच्चे मर नहीं जाते। हमारी पत्नी कैसे बचती। इसके गर्भ में बच्चा पल रहा है । कहां इलाज कराते। पैसा कहां से लाते। इस आफत में कौन मदद करता। दिनेश की हर बात में उसकी मजबूरी व मजलूमियत दिख रही थी। गाजियाबाद में मजूदरी करते थे। लॉक डाउन लगा तो रोजी-रोटी भी लॉक हो गई। जमा कमाई थोड़ी -बहुत थी उसे कुछ दिनों तक गुजर-बसर किया। पैसे खत्म हुए तो मकान मालिक ने भी घर से निकाल दिया। फिर कलेजे पर पत्थर रखकर अपने गांव लौटने का फैसला लिया। पांच दिनों तक गर्भवती पत्नी व बच्चों के साथ पैदल चले। फिर रास्ते में कहीं ट्रक से तो कहीं ट्रैक्टर से आगे बढ़ते रहे। पुलिस के डंडे भी खाए।
नहीं मिली मदद लुधियाना में
दिनेश राय की तरह बॉर्डर पर शुक्रवार को प्रवासियों का पहुंचना लगातार जारी रहा। खगड़िया के विनय राम,मुजफ्फरपुर के इंदल पासवान व पूर्वी चंपारण के अयोधी सिंह सबों के चेहरे पर चिंता,भय व भूख की लकीरें खिंची दिख रही थीं। घर पहुंचने की जल्दी थी। शुकन मांझी कहने लगे न कोई सरकार न कोई हाकिम। कोई मदद नहीं मिली लुधियाना में। कुछ पैसे बचा रखे थे घर भेजने के लिए। उसी से फांका- फूंकी खाते हुए चौदह दिनों में यहां पहुंचे हैं।
घर पहुंच गए तो मौत को पछाड़ देंगे
भीम राय को डर है कि उन्हें कहीं कोरोना नहीं हो गया हो। मजदूरों के जत्थे के साथ कंटेनर से आए हैं। कहने लगा क्या पता इसमें कौन बीमार है कौन चंगा। अब तक तो सांसे चल रही हैं। फिर वह एकबारगी हिम्मत के साथ कहने लगा कि साब अगर घर पहुंच जाएंगे तो मौत को भी पछाड़ देंगे।
मनीष भारती के फेसबुक timeline से साभार






Related News

  • हथुआ में बूथ स्तर पर पहुँचेगा जन सुराज
  • लड़कों में सम्मान के संस्कार से रुकेगा महिलाओं के प्रति अत्याचार : सुनीता साह
  • हथुआ नगर पंचायत में महिलाओं को घर में देंगे रोजगार : सुनीता संजय स्वदेश
  • ‘ नई नियमावली शिक्षकों के साथ धोखा ‘
  • तेली उत्थान समिति की कार्यकारिणी गठित
  • अवतार से अलग हैं गांधी जी के राम : संजय स्वदेश
  • `चुनाव बा, सब लोग मीठ बोली, आोहिमें सही आदमी चुनेकेबा`
  • राशन कार्ड बनवाने के नाम पर लुटी जा रही है जनता : संजय स्वदेश
  • Comments are Closed

    Share
    Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com