Saturday, February 22nd, 2020

 

बिहार कब तक रहेगा लिट्टी-चोखा के आसरे ?

– नवल किशोर कुमार सियासत भी बहुत कमाल की चीज है। इतनी कि बड़े-बड़े सूरमा तक इसकी थाह नहीं लगा सकते। क्या किसी ने सोचा होगा कि लिट्टी-चोखा के सहारे भी एक बड़े प्रदेश में होने वाले चुनाव की राजनीति की शुरूआत हो सकती है। लेकिन यही तो राजनीति है। इसमें हर किए का एक मतलब होता है। बेमतलब कुछ भी नहीं होता। इसलिए नरेंद्र मोदी द्वारा लिट्टी-चोखा खाने का खास मतलब है और इस मतलब से वे भी बेमतलब नहीं हैं जो बिहार में राजनीति करते हैं। कहने काRead More


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