वे कर सकते हैं। उनमें दम है

दिलीप सी मंडल

2011 की जनगणना के मुताबिक़ देश में 50 लाख बेज़ुबान यानी Voiceless लोग हैं। लेकिन उनमें से ज़्यादातर साइन लैंग्वेज या किसी और तरीक़े से अपनी बात दूसरों को समझा पाते हैं। बहुत कम हैं जिनको अपनी बात समझाने के लिए किसी और की मदद की ज़रूरत पड़ती है।

साइन लैंग्वेज सिखाने वाले देश में सिर्फ 700 स्कूल हैं। अगर आप बेजुबानों की सचमुच मदद करना चाहते हैं तो उनके बदले ख़ुद मत बोलिए। बल्कि उन्हें कम्युनिकेट करने में मदद कीजिए। उन्हें साइन लैंग्वेज सीखने का मौक़ा दीजिये। उन्हें आगे आने दीजिए। वे आत्मविशासहीन हो सकते हैं। लेकिन उन्हें अपाहिज मत बनाइए

वे कर सकते हैं। उनमें दम है।






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