बिहार के तीन लाख शिक्षकों के वेतन पर संकट
पटना। केन्द्र सरकार से पैसा नहीं मिलने के कारण राज्य के लाखों शिक्षकों का वेतन बंद होने की स्थिति बन गई है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के पास शिक्षकों के वेतन मद में पैसे न के बराबर बचे हैं। वेतन संकट की आहट देख राज्य सरकार ने केन्द्र से कहा है कि वह अविलंब सर्वशिक्षा अभियान की राशि बिहार को दे ताकि शिक्षकों के वेतन भुगतान का संकट दूर हो सके। गौरतलब है कि राज्य में चार लाख नियोजित शिक्षक हैं जिनमें से करीब तीन लाख सर्वशिक्षा अभियान के तहत प्रारंभिक स्कूलों में कार्यरत हैं। इनका वेतन भुगतान सर्वशिक्षा अभियान की राशि से होता है जिनमें केन्द्र और राज्य का 65:35 का योगदान रहता है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में बिहार ने केन्द्र सरकार से सर्वशिक्षा अभियान में विकास कार्यों समेत शिक्षकों के वेतन के लिए 9000 करोड़ रुपए की मांग की थी। मांग में कटौती के बाद केन्द्र सरकार ने 7300 करोड़ का बजट स्कीकृत किया था लेकिन यह पहली बार हुआ कि जून तक केन्द्र सरकार ने राशि नहीं दी। राज्य सरकार के दबाब पर पहली किस्त मिली भी तो महज 1000 करोड़ जबकि शिक्षकों के वेतन भुगतान पर ही इस वित्तीय वर्ष में 4000 करोड़ खर्च होने हैं। राशि कम पड़ने का असर यह हुआ है कि जून के बाद शिक्षकों के वेतन का पैसा जिलों को नहीं भेजा जा सका है।
बीईपी के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि यदि केन्द्र सरकार सर्वशिक्षा अभियान की दूसरी किस्त बिहार को शीघ्र नहीं देती है तो शिक्षकों को वेतन देना मुश्किल हो जाएगा। अभी ही आलम यह है कि जून के बाद वेतन का पैसा जिलों को भेजा नहीं जा सका है। इस विपरीत परिस्थिति को देखते हुए दूसरी किस्त के लिए शिक्षा विभाग ने केन्द्र को पत्र लिखा है।
कहीं मार्च से तो कहीं अप्रैल से है वेतन बंद
राज्य के नियोजित शिक्षकों व पुस्तकालयाध्यक्षों का वेतन किसी जिले में मार्च से कहीं अप्रैल से बंद है। जून के बाद तो किसी नियोजित शिक्षक को तनख्वाह नहीं मिली है। जुलाई से नियोजित शिक्षकों को वेतनमान मिलना है। इस वजह से जुलाई और अगस्त का वेतन नहीं भेजा गया है। वेतनमान भुगतान के लिए वेतन निर्धारण और साफ्टवेयर निर्माण के लिए विभाग ने कमेटी गठित की थी। कमेटी का प्रस्ताव सहमति के लिए वित्त विभाग में अटका है। लाइव हिंदुस्तान से
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